रायपुर, 07 अगस्त। Major Decision : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों के लंबित पेंशन और ग्रेच्यूटी प्रकरणों को लेकर चल रहे विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। प्रशासन ने कहा है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन, ग्रेच्यूटी एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, हाल ही में सेवानिवृत्त हुए 42 प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों के पेंशन प्रकरणों में से 15 को 90 प्रतिशत पेंशन स्वीकृत कर भुगतान किया जा रहा है। वहीं 15 अन्य मामलों को स्थानीय निधि संपरीक्षा, संचालनालय के सत्यापन के लिए भेजा गया है। सत्यापन और स्वीकृति मिलते ही इन मामलों में भी पेंशन भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा 12 पेंशन प्रकरण स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं, जिन पर विश्वविद्यालय स्तर से त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
नियुक्ति शर्तों को लेकर आपत्ति, फिर भी अंतरिम राहत
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि जिन सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों को वर्तमान में 90 प्रतिशत पेंशन दी जा रही है, उनके नियुक्ति आदेशों में दर्ज सेवा शर्तों तथा उनके पालन में सामने आई विसंगतियों को लेकर विश्वविद्यालय के लेखानियंत्रक और स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय द्वारा आपत्ति दर्ज की गई है।
मामले को अंतिम समाधान और मार्गदर्शन के लिए राज्य शासन को भेजा गया है। हालांकि, मानवीय आधार पर विश्वविद्यालय ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों को 90 प्रतिशत पेंशन का भुगतान जारी रखा है।
प्रशासन का कहना है कि अन्य विसंगतिपूर्ण लंबित पेंशन प्रकरणों का भी तेजी से निराकरण किया जा रहा है और स्वीकृति मिलते ही संबंधित पेंशनरों को भुगतान तत्काल शुरू कर दिया जाएगा।
पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते में भी बढ़ोतरी
पेंशनरों की एक प्रमुख मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने राहत देते हुए महंगाई भत्ते की दर 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दी है। इस संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया है। इससे सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों को मिलने वाली पेंशन राशि में वृद्धि होगी।
वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने का प्रस्ताव शासन के पास
वहीं विश्वविद्यालय में कार्यरत वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर भी प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों द्वारा प्राध्यापक संवर्ग की तरह ही सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने की मांग की गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस प्रस्ताव को प्रबंध मंडल से पारित कर राज्य शासन को मार्गदर्शन के लिए भेजा जा चुका है। हालांकि, शासन से मार्गदर्शन अभी अपेक्षित है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोहराया कि सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों के पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ लिया जा रहा है तथा लंबित मामलों के निराकरण के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

