Maternity Leave: Major verdict by the Chhattisgarh High Court! Contractual, daily-wage, and guest female employees will also be entitled to maternity leave.
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बिलासपुर, 24 जून 2026/ Maternity Leave: Major verdict by the Chhattisgarh High Court! Contractual, daily-wage, and guest female employees will also be entitled to maternity leave.

Maternity Leave : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मस्टर रोल और अतिथि महिला कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश एक वैधानिक, संवैधानिक और मानवीय अधिकार है, जिसे किसी महिला कर्मचारी की नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर नकारा नहीं जा सकता।

अतिथि व्याख्याता की याचिका पर आया फैसला

मामला रायपुर की एक महिला अतिथि व्याख्याता की याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने मातृत्व अवकाश अवधि का वेतन नहीं दिए जाने को चुनौती दी थी। विभाग ने यह कहते हुए लाभ देने से इनकार कर दिया था कि वह नियमित कर्मचारी नहीं हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभाग के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि किसी महिला को केवल “अतिथि” या “संविदा” कर्मचारी बताकर मातृत्व लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

नौकरी की प्रकृति के आधार पर नहीं होगा भेदभाव

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मातृत्व एक प्राकृतिक और सामाजिक दायित्व है। इसलिए महिला कर्मचारी चाहे नियमित हो, संविदा पर कार्यरत हो, दैनिक वेतनभोगी हो या मस्टर रोल कर्मचारी, उसे मातृत्व संरक्षण और अवकाश का समान अधिकार प्राप्त है।

हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को मातृत्व अवकाश अवधि का बकाया वेतन तीन महीने के भीतर भुगतान किया जाए।

हजारों महिलाओं को मिल सकती है राहत

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल एक याचिकाकर्ता (Maternity Leave) तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य के शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, नगरीय प्रशासन समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों संविदा और अतिथि महिला कर्मचारियों को इस निर्णय से लाभ मिलने की संभावना है।