संसद में नया खनन विधेयक पेश, लिथियम और कोबाल्ट निकालने वाली कंपनियों को मिलेगी भारी राहत

New mining bill introduced in Parliament

New mining bill introduced in Parliament

Share This Article

रायपुर, 11 अगस्त 2026 / ETrendingIndia / केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया. इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत के माइनिंग सेक्टर में बड़े सुधार करना, व्यापार को आसान बनाना और देश में लिथियम जैसे जरूरी खनिजों की खोज और उत्पादन को तेज करना है. यह विधेयक पुराने खनिज कानून (1957) की जगह लेगा.

नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी कंपनी के पास किसी एक खनिज के खनन का लाइसेंस (पट्टा) है और उसी क्षेत्र में कोई दूसरा खनिज भी मिल जाता है, तो वह कंपनी राज्य सरकार से उसे भी अपनी लीज में शामिल करने की मांग कर सकती है. इसके लिए कंपनियों को अलग से लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा. देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, सोना और चांदी जैसे रणनीतिक रूप से जरूरी खनिजों के खनन पर विशेष राहत दी गई है. अगर कंपनियां इन खनिजों को अपनी मौजूदा लीज में शामिल करती हैं, तो उन्हें कोई अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी. दूसरे सामान्य खनिजों को जोडऩे पर नियमानुसार रॉयल्टी या नीलामी प्रीमियम देना होगा.

सरकार ने कैप्टिव खदानों (जो कंपनियां केवल अपने इस्तेमाल के लिए खनिज निकालती हैं) पर लगी 50त्न की बिक्री सीमा को पूरी तरह हटा दिया है. अब ये खदानें अपनी जरूरत पूरी करने के बाद बचा हुआ 100त्न खनिज खुले बाजार में बेच सकेंगी. इसके साथ ही, खदान

परिसर में पहले से जमा खनिज मलबे (डंप) को भी बेचने की अनुमति राज्य सरकारें दे सकेंगी. खनिजों की खोज के लिए बने नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का दायरा अब बढ़ा दिया गया है. इसका नया नाम नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट होगा, जो खोज के साथ-साथ खदानों के विकास के लिए भी पैसा देगा. जमीन से 200 मीटर से अधिक गहराई में मिलने वाले खनिजों के लिए कंपनियों को उनके माइनिंग एरिया में 10त्न से 30त्न तक का वन-टाइम विस्तार दिया जाएगा.

खनिजों के व्यापार में पारदर्शिता लाने के लिए देश में मिनरल एक्सचेंज बनाया जाएगा. यह एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होगा, जहां शेयर बाजार की तरह खनिजों और धातुओं की खरीद-बिक्री हो सकेगी. इनसाइडर ट्रेडिंग और धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार इसके कड़े नियम बनाएगी.