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रायपुर, 07 सितंबर/ ETrendingIndia / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लंदन में ‘Celebration of Oneness’ कार्यक्रम में कहा कि दुनिया को संघर्षों और विभाजन से बाहर निकालने के लिए विविधता का सम्मान, आपसी अपनापन और समानताओं पर जोर जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हिंदू विचार का मूल संदेश है कि विविधता स्वाभाविक है, लेकिन मूल रूप से सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं।

‘नफरत नहीं, शुद्ध सात्त्विक प्रेम संघ की नींव’

भागवत ने RSS की विचारधारा पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए कहा कि संघ के काम का आधार नफरत नहीं, बल्कि ‘शुद्ध सात्त्विक प्रेम’ और अपनापन है।

उनके अनुसार समाज, समुदाय और पूरी मानवता के प्रति निस्वार्थ आत्मीयता संघ के काम की मूल भावना है।

विविधता को स्वीकार करना जरूरी

उन्होंने कहा कि दुनिया में अलग-अलग विचार, संस्कृतियां और जीवन-पद्धतियां होना स्वाभाविक है। एकता का मतलब सबका एक जैसा होना नहीं है। अलग-अलग रास्तों और विचारों का सम्मान करते हुए साथ रहना ही वास्तविक सामाजिक एकता है।

‘जो जोड़ता है, उस पर ध्यान दें’

भागवत ने कहा कि दुनिया को उन बातों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए जो लोगों को जोड़ती हैं, न कि उन पर जो उन्हें बांटती हैं।

‘जियो और जीने दो’ की भावना के साथ आगे बढ़ने से संघर्ष और टकराव कम किए जा सकते हैं।

RSS ने भी उनके संदेश को सेवा, सामाजिक सद्भाव और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से जोड़ा है।

ब्रिटेन दौरे का शताब्दी वर्ष से जुड़ा कार्यक्रम

भागवत का लंदन दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम का हिस्सा है। उन्होंने ब्रिटेन में धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात भी की।


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