Share This Article रायपुर, 21 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता पर भरोसा जताते हुए ISRO को अपने महत्वाकांक्षी ‘Moon Base’ कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है। NASA चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चरणबद्ध तरीके से ऐसा बेस बनाना चाहता है, जहां अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर शोध कर सकें और भविष्य के डीप-स्पेस मिशनों की तैयारी की जा सके। NASA का बड़ा मून मिशन NASA का Moon Base कार्यक्रम रोबोटिक मिशनों से शुरू होकर चंद्रमा पर बिजली, संचार, परिवहन और अन्य जरूरी ढांचा विकसित करने तथा आगे चलकर इंसानों के लंबे समय तक रहने की व्यवस्था बनाने की योजना है। ISRO की भूमिका अहम अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, NASA ने ISRO को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता, खासकर चंद्रयान-3 की सफलता के बाद, इस साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग होगा मजबूत पिछले पखवाड़े बेंगलुरु में हुई भारत-अमेरिका सिविल स्पेस ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक में Moon Base के साथ वैज्ञानिक डाटा साझा करने और भविष्य के विज्ञान व मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दक्षिणी ध्रुव ही क्यों? चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां स्थायी छाया वाले क्षेत्रों में जल-बर्फ मिलने की संभावना है, जो भविष्य में इंसानों के लंबे प्रवास और संसाधनों के उपयोग के लिए अहम हो सकती है। भारत के लिए बड़ा मौका यह साझेदारी ISRO को भविष्य के चंद्र अभियानों, मानव अंतरिक्ष उड़ान और डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका दे सकती है। भारत पहले ही 2023 में Artemis Accords में शामिल हो चुका है। Share This Article Post navigation एक्स पर पोस्ट हटाने की वजह…! अब जान सकेंगे यूजर्स अंतरिक्ष के बड़े रहस्यों से उठेगा पर्दा…! रविवार को लॉन्च होगा NASA का ‘रोमन’ टेलीस्कोप