Innovative initiative of de-addiction Innovative initiative of de-addiction
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रायपुर 21 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / (रघुवर दयाल गोहिया की कलम से ) Innovative initiative of de-addiction: First quit drinking yourself, now motivating others / नशा मुक्ति अभिनव पहल , नशा मुक्त भारत अभियान की परिकल्पना को साकार करने के लिए मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में अभिनव पहल की जा रही है।

यहां का परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र वास्तव में नशे की गिरफ्त में आने वाले लोगों के लिये वरदान साबित हो रहा है।

यहां से प्रत्येक माह 15 युवक नशा मुक्त होकर अपने परिवार मे खुशी खुशी वापसी कर रहे हैं। साथ ही अन्य लोगों को भी नशा त्याग करने के लिये प्रेरित कर रहे हैं।

परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना सन 2012 में युवा समाजसेवी एवं राज्य की प्रथम गुरु नानक युवा राज्य सम्मान प्राप्त श्रीमती इंदिरा शर्मा ने सामाजिक न्याय विभाग के साथ जन सहयोग से शुरू की थी।

निशुल्क इलाज

यहां नशे से पीड़ित व्यक्तियों का निशुल्क इलाज किया जाता है। साथ ही यहां एम्स दिल्ली और भारत सरकार से नशा मुक्ति मे विशेष प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर,नर्स काउंसलर, वार्ड बॉय और अतिरिक्त स्टाफ की पूरी टीम काम करती है।

प्रतिदिन व्यक्तिगत काउंसलिंग

केंद्र मे आवश्यक दवाइयों के उपचार के साथ ही काउंसलिंग द्वारा उनकी जीवन शैली में परिवर्तन लाने के प्रयास किए जाते हैं। मरीज के भर्ती होने के शुरुआती 7 दिन में डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रतिदिन व्यक्तिगत काउंसलिंग की जाती है।

जिसमें वह स्वयं के द्वारा नशा करने के कारण बताते हैं इन कारणों में आधुनिक जीवन शैली पारिवारिक तनाव, बेरोजगारी आर्थिक बोझ किसी से प्यार में ब्रेकअप अकेलापन अथवा गलत संगत के कारण वे नशे में लिप्त हो जाते हैं। थोड़े समय का नशा बाद में एडिक्शन मे बदल जाता है।

मोटिवेशन फिल्में

साथ ही ग्रुप काउंसलिंग के अलावा प्रतिदिन मोटिवेशन फिल्में दिखाई जाती हैं।जिससे नशा छोड़ने के साथ मरीज के अंदर बगैर नशे के जीवन जीने की प्रेरणा जाग्रत हो जाती है।

योग, ध्यान, प्राणायाम के साथ खेल,गीत संगीत व डांस एक्टिविटी

यहां भर्ती होने वाले लोगों को योग, ध्यान, प्राणायाम सिखाया जाता है और विविध प्रकार के खेल,गीत संगीत व डांस एक्टिविटी (गत्यात्मक ध्यान ) के द्वारा वह शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत होते जाते हैं।

इस संबंध में मुख्य काउंसलर डॉक्टर शैलेंद्र कटारिया ने बताया कि सही समय पर उपचार शुरू करने से निरन्तर काउंसलिंग द्वारा मरीज की मनो स्थिति में बदलाव संभव होता है जो हमेशा जारी रह सकता है। जो मरीज ठीक होकर घर चले जाते हैं संस्था द्वारा उनका निरन्तर फॉलोअप भी किया जाता है।

परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र में समय-समय पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय दिल्ली के अधिकारी एवं राज्य तथा जिले के अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं । साथ ही जिला न्यायालय के न्यायाधीशगण और विधिक सहायता अधिकारी भी काउंसलिंग करते हैं।

नशा मुक्ति केंद्र के परियोजना अधिकारी सुरेंद्र रघुवंशी बताते हैं कि यहां पर लगभग 50 से 60% लोग नशे से जंग मे जीत हासिल कर अपनी सामान्य जीवन शैली फिर से शुरू कर देते हैं।

इसी तरह एक पेशेंट राजू परिवर्तित नाम आज पूरी तरह ठीक हो चुका है। और नशा मुक्ति केंद्र में आकर ही अपनी सेवाएं दे रहा है मुकेश कुशवाहा परिवर्तित नाम पहले गांजे के नशे के भयानक जाल में फंसे हुए थे लेकिन अब वे पीयर एजुकेटर के रूप में मध्यस्थता कर के नशे से पीड़ित व्यक्तियों को परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र उपचार हेतु में ला रहे हैं।

फिलहाल 15 पलंग के इस नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों के लिए उचित व्यवस्था और अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है।

नशा मुक्ति केंद्र के संचालक वेदप्रकाश शर्मा ने बताया कि यहां विदिशा, गुना, अशोकनगर, रायसेन ,सागर ,भोपाल आदि जिलों के लोग नशे की खतरनाक बीमारी में फंस कर आते हैं।

आईएसओ प्रमाण पत्र

यह संस्था वर्ष भर में 200 से 300 मरीजों को नशा मुक्त करने में सफलता प्राप्त कर रही है। संस्था की उत्कृष्ट कार्यशैली को देखते हुए गत वर्ष अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप कार्य करने वाली संस्था मानते हुए राष्ट्रीय मानक केंद्र द्वारा आईएसओ प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है।


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