Skill from violence
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रायपुर, 21 दिसम्बर 2025 / ETrendingIndia / Skill from violence: Where once there were guns, now there are tools to shape the future / नक्सली पुनर्वास प्रशिक्षण , सुकमा की धरती पर एक ऐतिहासिक बदलाव आकार ले रहा है। जिन हाथों ने कभी हिंसा का रास्ता पकड़ा था, आज वही हाथ इमारतों की नींव रख रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल ने यह साबित कर दिया है कि भरोसा, संवाद और अवसर मिलें तो भटके हुए जीवन भी नई दिशा पा सकते हैं।

सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र में रह रहे 35 आत्मसमर्पित नक्सली आज राजमिस्त्री (मेसन) बनने की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त सहयोग से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 15 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल हैं।

इन्हें नींव निर्माण, ईंट चिनाई, प्लास्टर, छत ढलाई और निर्माण गुणवत्ता जैसे कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ये पूरी दक्षता के साथ रोजगार से जुड़ सकें।

यह प्रशिक्षण केवल रोज़गार का जरिया नहीं, बल्कि सम्मान के साथ समाज में लौटने का अवसर है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये सभी युवा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत घरों के निर्माण में भागीदारी करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय मिलेगी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्रियों की कमी भी दूर होगी।

पोलमपल्ली निवासी पोड़ियम भीमा, जो कभी 30 वर्षों तक संगठन से जुड़े रहे, कहते हैं—

“आत्मसमर्पण के बाद ज़िंदगी बदल गई है। यहाँ सम्मान, सुरक्षा और हुनर—तीनों मिल रहे हैं। अब मैं अपने श्रम से पहचान बनाऊँगा।”

वहीं पुवर्ती की मुचाकी रनवती, जिन्होंने 24 वर्ष संगठन में बिताए, गर्व से बताती हैं कि पुनर्वास के बाद उन्हें सिलाई और अब राजमिस्त्री का प्रशिक्षण मिला।

बस्तर ओलंपिक में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार जीतना उनके बदले जीवन की पहचान बन गया है।

डब्बमरका के गंगा वेट्टी बताते हैं कि प्रशासन ने उन्हें न सिर्फ प्रशिक्षण, बल्कि मोबाइल, राजमिस्त्री किट और सभी आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। “अब किसी परेशानी में अधिकारी सीधे सुनते हैं,” वे कहते हैं ।

कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव के शब्दों में,
“आत्मसमर्पण का अर्थ सिर्फ हथियार छोड़ना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में लौटना है।”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का स्पष्ट संदेश है—

“संवाद, संवेदना और विकास के जरिए ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति लाई जा सकती है।”

सुकमा में चल रही यह पहल बताती है कि हिंसा के अंधेरे से हुनर की रोशनी तक का सफर संभव है। यही पुनर्वास की असली सफलता है—और यही शांत, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव।