Share This Article रायपुर, 05 सितंबर/ ETrendingIndia / नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भी प्राकृतिक आपदा का संकट लगातार बना हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों में रह-रहकर भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। ताजा घटना दार्चुला जिले में हुई है, जहां भारी भूस्खलन के कारण चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों में सतर्कता जारी करते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों से सावधान रहने की अपील की है। दार्चुला स्थित जिला प्रशासन कार्यालय ने चेतावनी दी है कि लगातार मलबा गिरने के कारण नदी का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो सकता है। इससे नदी के पानी के अचानक जमा होने और बाद में निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई है। भूस्खलन की यह घटना एपी हिमालय ग्रामीण नगरपालिका के भट्टर क्षेत्र में हुई। भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा चौलानी नदी में गिरने के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने चौलानी नदी के किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री खगराज भट्टा ने स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को उच्च चेतावनी की स्थिति में रहने तथा किसी भी संभावित आपात परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। नेपाल में बाढ़ और उससे जुड़ी आपदाओं के कारण अब तक 1,344 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 12 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। पांच हजार 300 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार के अनुसार, भीषण बाढ़ से अब तक 32 हजार 933 लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, नेपाल में आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 169 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 275 भारतीय अभी भी लापता हैं। बीते दिन त्रिशूली बाजार क्षेत्र से तीन भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। भारतीय एजेंसियां नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रही हैं। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ से छह हजार 500 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। आपदा में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि तीन अन्य स्वास्थ्य केंद्र आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके अलावा 37 वाहनों के आवागमन योग्य पुल और 68 झूला पुलों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। नेपाल के वरिष्ठ सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने दावा किया है कि इस आपदा के कारण देश को 800 अरब नेपाली रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए बड़े स्तर पर सहायता भेजी है। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। भारतीय वायुसेना के अब तक सात विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुके हैं। भारत ने राहत और बचाव अभियान में सहयोग के लिए 54 विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल भेजी है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 विधि विज्ञान विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल है। भारतीय विशेषज्ञों की टीमें नेपाल में आपदा प्रभावित लोगों की पहचान से जुड़े कार्यों में भी सहयोग कर रही हैं और डीएनए नमूनों की जांच में नेपाली अधिकारियों की मदद कर रही हैं। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया है। प्रशासन ने विशेष रूप से नदियों के किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Share This Article Post navigation नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के 9 दिन बाद सुरंग से जीवित निकाले गए 2 लोग यूएन ने बदला दुनिया का नक्शा; 164 देशों ने किया समर्थन, विरोध में उतरा अमेरिका