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रायपुर, 05 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कहा कि दुनिया नए ग्लोबल ऑर्डर की ओर बढ़ रही है।

अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच उभरती और मध्यम ताकतें अपने विकल्प बढ़ाने, जोखिम घटाने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। अब देशों के लिए सहयोग की शर्त पूरी तरह समान विचारधारा नहीं, बल्कि साझा हित बनते जा रहे हैं।

‘गोल्डीलॉक्स’ स्थिति में दुनिया

जयशंकर ने कहा कि अमेरिका-चीन मुकाबले के बीच दुनिया ऐसी स्थिति चाहती है, जहां हालात न बहुत तनावपूर्ण हों और न ही बहुत शांत—यानी संतुलन बना रहे।

साझा हित ही सहयोग का आधार

उन्होंने कहा कि देशों के विचार पूरी तरह समान होना जरूरी नहीं है। यदि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर हित मिलते हैं और सीधा टकराव नहीं है, तो देश साथ काम कर सकते हैं।

क्वाड से लेकर ब्रिक्स तक उदाहरण

जयशंकर ने क्वाड, ब्रिक्स, IMEC और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी पहलों को बदलते वैश्विक सहयोग का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक आवाज कई बार अलग-अलग देशों की आवाज से ज्यादा प्रभावी होती है।

भारत की पहल का बढ़ता प्रभाव

उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और CDRI का भी उल्लेख किया। जयशंकर के मुताबिक, ये भारत की पहल पर शुरू हुईं और वैश्विक स्तर पर सफल सहयोग के उदाहरण बनी हैं।


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