रायपुर ,30 मई 2026/ First plastic note: Big decision taken in two high-level meetings of RBI /
Plastic Currency : भारत की करेंसी (मुद्रा) के इतिहास में जल्द ही एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक बार फिर अपने सालों पुराने विचार पर गंभीरता से आगे बढऩे जा रहा है, जिसके तहत देश में जल्द ही पहला प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट पेश किया जा सकता है।
मौजूदा समय में आरबीआई की तरफ से केवल खास तरह के कागज (कॉटन रैग) से बने नोट ही प्रिंट किए जाते हैं, लेकिन अब इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलने की तैयारी अंतिम चरण में है।
दो अहम बैठकों में बनी रणनीति
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की पिछली दो केंद्रीय बोर्ड मीटिंग्स के दौरान देश में प्लास्टिक नोट्स लाने को लेकर बेहद गंभीर और विस्तृत चर्चा हुई है।
बता दें कि केंद्रीय बैंक की ये दोनों हाई-लेवल बैठकें क्रमश: पटना और मुंबई में आयोजित की गई थीं। रिपोर्ट की मानें तो आरबीआई बहुत जल्द देश के कुछ चुनिंदा हिस्सों में प्लास्टिक बैंक नोट्स को लॉन्च करने के लिए एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।
2012 में भी हुई थी कोशिश, तकनीकी दिक्कतों से रुका था प्रोजेक्ट
यह पहली बार नहीं है जब देश में प्लास्टिक नोट लाने की कवायद की जा रही है। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने देश के 5 अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु वाले शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 रुपये के प्लास्टिक नोट जारी करने की पूरी तैयारी कर ली थी।
हालांकि, उस समय कुछ गंभीर तकनीकी चुनौतियों और छपाई से जुड़ी अड़चनों के कारण इस पूरी कोशिश को बीच में ही रोकना पड़ा था। लेकिन अब अत्याधुनिक तकनीक के साथ आरबीआई इस पर दोबारा काम कर रहा है।
क्यों कागज छोड़ प्लास्टिक नोट अपनाना चाहता है RBI ?
कम लागत और लंबी शेल्फ लाइफ: कागज से बने नोटों की शेल्फ लाइफ (जीवनकाल) बेहद कम होती है। वे पानी में भीगने, फटने या लगातार इस्तेमाल से जल्दी खराब हो जाते हैं। इसके विपरीत, प्लास्टिक के नोट पानी और मिट्टी से खराब नहीं होते, इन्हें फाडऩा बेहद मुश्किल होता है और ये कागज के मुकाबले करीब 4 से 5 गुना अधिक समय तक चलते हैं। हालांकि इनकी छपाई की शुरुआती लागत थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन लंबे समय में यह बेहद किफायती साबित होते हैं।
करोड़ों खराब नोटों को नष्ट करने का भारी बोझ: मौजूदा समय में खराब हो चुके कागजी नोटों को नष्ट करना केंद्रीय बैंक के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अकेले वित्त वर्ष 2025 में आरबीआई को कुल 23.80 बिलियन (2,380 करोड़) खराब हो चुके नोटों को नष्ट करना पड़ा था, जो कि इससे पिछले वित्त वर्ष (21.24 बिलियन नोट) के मुकाबले सालाना आधार पर 12.3 प्रतिशत अधिक है।
नष्ट किए गए नोटों में सबसे बड़ी संख्या 500 रुपये और फिर 100 रुपये के नोटों की थी, जो बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुके थे। प्लास्टिक नोट आने से इस बर्बादी पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।
