रायपुर, 20 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “RBI’s big action…! Penalty imposed on 6 companies including Muthoot Finance, here is the big reason…” भारतीय रिजर्व बैंक ने नियामकीय नियमों का उल्लंघन करने पर छह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने अलग-अलग मामलों में नियमों का पालन नहीं करने पर इन कंपनियों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया है।
हालांकि, RBI ने साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय कमियों के कारण की गई है और इससे ग्राहकों की जमा राशि या सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
किन कंपनियों पर कितना लगा जुर्माना ?
RBI की अधिसूचना के अनुसार, अवेल फाइनेंशियल सर्विसेज पर सबसे अधिक 6.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं मुथूट फाइनेंस पर 5.80 लाख रुपये, सत्या माइक्रोकैपिटल और क्क्रहृ श्वद्वड्डद्वद्ब ष्टशह्यद्वद्गस्र पर 3.10-3.10 लाख रुपये, जबकि धनी लोन्स एंड सर्विसेज और मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस पर 2.70-2.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
मुथूट फाइनेंस पर क्यों हुई कार्रवाई ?
RBI के अनुसार, मुथूट फाइनेंस ग्राहकों के खातों के जोखिम का समय-समय पर उचित आकलन करने में विफल रही। इसके अलावा कंपनी के पास संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पहचान और समय पर रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक मजबूत तकनीकी प्रणाली भी नहीं थी। इन कमियों को गंभीर मानते हुए केंद्रीय बैंक ने आर्थिक दंड लगाया।
अन्य कंपनियों की क्या रही चूक ?
अवेल फाइनेंशियल सर्विसेज पर आरोप है कि उसके प्रबंध निदेशक दो अन्य हृक्चस्नष्ट में भी निदेशक पद पर थे। साथ ही कंपनी ने एक ग्राहक या समूह को निर्धारित सीमा से अधिक ऋण उपलब्ध कराया। क्क्रहृ श्वद्वड्डद्वद्ब ष्टशह्यद्वद्गस्र पर भी एक ही समूह की कंपनियों को तय सीमा से अधिक कर्ज देने के कारण कार्रवाई की गई। वहीं सत्या माइक्रोकैपिटल ने पुनर्गठित किए गए कुछ ऋण खातों को समय पर हृक्क्र घोषित नहीं किया, जो क्रक्चढ्ढ के नियमों का उल्लंघन माना गया।
क्या ग्राहकों को घबराने की जरूरत है ?
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई से ग्राहकों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। क्रक्चढ्ढ नियमित रूप से बैंकों और हृक्चस्नष्ट की निगरानी करता है और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाता है।
इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि भविष्य में कंपनियां नियामकीय मानकों का बेहतर पालन करें और ग्राहकों के हित सुरक्षित रहें।
