रायपुर, 03 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कच्चे तेल-प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए केंद्र सरकार ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना’ को मंजूरी दी है।
योजना के तहत गहरे समुद्र में तेल-गैस की खोज के लिए ड्रिलिंग लागत का 50% या अधिकतम ₹650 करोड़ प्रति कुआं सरकार वहन करेगी।
60 गहरे समुद्री कुओं की होगी ड्रिलिंग
अगले पांच वर्षों में गहरे और अत्यधिक गहरे समुद्र में 60 एक्सप्लोरेशन वेल (कुओं) की ड्रिलिंग को सरकारी सहायता मिलेगी। इसका उद्देश्य नए तेल और गैस भंडारों की खोज को तेज करना है।
प्रति कुआं ₹650 करोड़ तक की सरकारी मदद
सरकार प्रत्येक गहरे समुद्री कुएं की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹650 करोड़ तक वहन करेगी। इससे निजी कंपनियों का वित्तीय जोखिम काफी कम होगा।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
योजना का लक्ष्य घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है। अनुमान है कि इससे हर साल 10–15 मिलियन टन तेल समकक्ष अतिरिक्त उत्पादन जुड़ सकता है और आयात निर्भरता में 3–5% तक कमी आ सकती है।
₹84,084 करोड़ का बजट कैसे खर्च होगा ?
₹43,200 करोड़ – गहरे समुद्र में ड्रिलिंग
₹28,534 करोड़ – समुद्री भूकंपीय (सीस्मिक) सर्वे
₹10,000 करोड़ – पाइपलाइन व तटीय प्रसंस्करण सुविधाएं
₹2,000 करोड़ – तेल-गैस विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र का विकास
कॉमन हब इंफ्रास्ट्रक्चर से घटेगी लागत
सरकार साझा पाइपलाइन और प्रोसेसिंग सुविधाओं के विकास में भी सहयोग करेगी, जिससे कई कंपनियां एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर सकेंगी और परियोजनाओं की लागत कम होगी।
क्यों जरूरी है यह योजना ?
भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता 88% तक पहुंच चुकी है। ऐसे में समुद्री क्षेत्रों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गेम चेंजर मानी जा रही पहल
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार द्वारा पहली बार सीधे जोखिम भरे समुद्री अन्वेषण में वित्तीय सहायता देना वैश्विक ऊर्जा कंपनियों को आकर्षित करेगा और भारत के अपतटीय तेल-गैस क्षेत्र में निवेश को नई गति देगा।
