Samudra Manthan' scheme
Samudra Manthan scheme
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रायपुर, 1 अगस्त/ ETrendingIndia / केंद्र सरकार ने गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन को गति देने के लिए 84,084 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है।

इस योजना का उद्देश्य घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना, रोजगार सृजित करना और भारत को अपतटीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू होने वाली इस योजना पर कुल 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

दो चरणों में होगा काम

पहले चरण में समुद्र के भीतर तेल और गैस भंडारों की पहचान के लिए व्यापक सर्वे और डेटा संग्रह होगा।

दूसरे चरण में गहरे समुद्र से तेल एवं गैस का उत्पादन शुरू किया जाएगा।

किस मद में कितना खर्च ?

28,500 करोड़ रुपये: सर्वे, भूकंपीय डेटा संग्रह और विश्लेषण।

43,200 करोड़ रुपये: तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन।

10,000 करोड़ रुपये: लंबित परियोजनाओं और साझा अपतटीय अवसंरचना को बढ़ावा।

2,000 करोड़ रुपये: तेल एवं गैस विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र (हब) की स्थापना।

60 करोड़ टन भंडार मिलने की उम्मीद

सरकार का अनुमान है कि इस योजना से लगभग 60 करोड़ टन कच्चे तेल और गैस के नए भंडार खोजे जा सकते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयातित तेल-गैस पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

रोजगार और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, अपतटीय तकनीक का विकास होगा और ‘मेक इन India’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई गति मिलेगी।

भारत बनेगा वैश्विक अपतटीय ऊर्जा केंद्र

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से निजी निवेश बढ़ेगा, अत्याधुनिक समुद्री तकनीकों का विकास होगा और भारत वैश्विक अपतटीय तेल एवं गैस उद्योग में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।