सुरमई शाम
सुरमई शाम
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सुनहरी लहरों पर झिलमिल धूप,
उतर रहा है जैसे सांझ का रूप ।

ताड़ का पेड़ खड़ा मौन सा प्रहरी,
निहार रहा है नभ का रंग सिंदूरी ।

हवा में घुली है शांति की बात,
झांझ तरिया कहे —
तनिक ठहर जाओ मेरे साथ ।।

दिन का उजाला सिमटने लगा,
सपनों का आकाश चमकने लगा ।

हर लहर में है कविता की तान,
प्रकृति गा रही जैसे सुदंर गान ।

सुरमई शाम का यह पल है ‘अमोल’,
नवा रायपुर में थम गया है भूगोल ।।

( छायांकन- श्री अमोल गुप्ता )

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