अंधेरे की काल-कोठरी में,कब तक साये से बतियाओगे ?खयाली दीवारों पर तुम,कब तक माथा टकराओगे ? भ्रम तोड़ो! वह परछाई नहीं,वह कायरता का डेरा है।उजाला अभी दूर सही,पर चीखों ने तुम्हें घेरा है। सुनो!वह सिसकी नहीं, वह क्रांति की पहली आहट है,सत्ता के गलियारों में, उठती एक गड़गड़ाहट है।जो चुप बैठे हैं डर के मारे, […]
