Share This Article रायपुर / ETrendingIndia / ट्रंप प्रशासन का नया प्रस्ताव अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रंप H-1B वीजा शुल्क को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने कंपनियों से हर साल 1 लाख डॉलर वीजा शुल्क लेने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम खासतौर पर उन तकनीकी कंपनियों पर असर डालेगा जो भारतीय और चीनी पेशेवरों पर निर्भर हैं। H2: टेक सेक्टर पर संभावित असर H-1B वीजा शुल्क बढ़ने से टेक सेक्टर को भारी झटका लग सकता है। बड़े स्तर पर काम करने वाली कंपनियां तो इसका खर्च उठा सकती हैं, लेकिन छोटे स्टार्टअप और उभरते उद्यमों पर गहरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियां उच्च मूल्य वाले काम विदेशों में शिफ्ट कर सकती हैं। H2: भारतीय पेशेवरों पर सीधा प्रभाव सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी है। वर्ष 2024 में 71% से अधिक वीजा भारतीय पेशेवरों को मिले। ऐसे में ट्रंप H-1B वीजा शुल्क सीधे भारतीय आईटी कंपनियों और कर्मचारियों को प्रभावित करेगा। इंफोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के शेयर इस खबर के बाद गिरावट में बंद हुए। H2: आलोचना और समर्थन इस कदम को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आलोचकों का कहना है कि यह नवाचार और ग्लोबल टैलेंट को हतोत्साहित करेगा। वहीं समर्थकों का मानना है कि इससे अमेरिकी नौजवानों को अधिक अवसर मिलेंगे। हालांकि, यह कदम अमेरिका की टेक्नोलॉजी लीडरशिप और ग्लोबल प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर डाल सकता है। Share This Article Post navigation यूरोपीय एयरपोर्ट साइबर अटैक से उड़ानों में देरी और रद्दीकरण पाकिस्तानी सेना का अपने ही नागरिकों पर कहर, आधी रात को लड़ाकू विमानों से बरसाए बम; 30 की मौत