Share This Article वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन क्षेत्रों को अतिक्रमण से मुक्त कराने और वन्यजीव आवासों के संरक्षण की दिशा में बड़ी कार्रवाई की गई है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के सीतानदी कोर रेंज में लगभग 106 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि को मुक्त कराया गया। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से हुई इस कार्रवाई में धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और यूएसटीआर की महिला वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अग्रिम भूमिका निभाई। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश की वन संपदा और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। संवेदनशील वन क्षेत्रों में अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के साथ आधुनिक तकनीक से निगरानी और मुक्त कराई गई भूमि के पारिस्थितिक पुनस्र्थापन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने अभियान में महिला वनबल की भूमिका की सराहना करते हुए इसे वन संरक्षण के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बताया। चार वर्षों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि अतिक्रमण मुक्त यूएसटीआर में पिछले चार वर्षों से अतिक्रमण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। सीतानदी कोर रेंज की वर्तमान कार्रवाई इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है।अभिलेखों के अनुसार संबंधित क्षेत्र में वर्ष 2011-13 के दौरान लगभग 45 हेक्टेयर अतिक्रमण दर्ज था, जो समय के साथ बढ़कर लगभग 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया। अतिक्रमण के विस्तार की सटीक पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया।सैटेलाइट और ड्रोन से हुआ सटीक सीमांकन यूएसटीआर ने आईएसआरओ की सैटेलाइट इमेजरी और डीजीपीएस आधारित ड्रोन मैपिंग के माध्यम से क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन किया। अलग-अलग वर्षों की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से वन क्षेत्र में आए बदलावों का आकलन किया गया और ड्रोन सर्वे के जरिए अतिक्रमित भूमि का सटीक सीमांकन किया गया। प्रकरण में कुल 166 आरोपियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 40 की गिरफ्तारी की जा चुकी है। विभाग द्वारा वैज्ञानिक साक्ष्यों, मैदानी अभिलेखों और उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। मुक्त कराई भूमि पर 1,500 पौधों का रोपण अतिक्रमण हटाने के साथ ही क्षेत्र में पारिस्थितिक पुनस्र्थापन का काम शुरू किया गया है। इसके तहत कंटूर ट्रेंच निर्माण, वर्षाजल संचयन, मृदा-नमी संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और लगभग 1,500 पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में प्राकृतिक वनस्पति को पुनर्जीवित कर वन्यजीव आवास को उसके प्राकृतिक स्वरूप में बहाल करना है। मुक्त कराया गया क्षेत्र हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है और महानदी के उद्गम क्षेत्र के निकट स्थित है। इस कारण इसका संरक्षण वन्यजीवों की आवाजाही, जल संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। महिला वनबल ने संभाला मोर्चा अभियान में धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की महिला वन अधिकारियों एवं वनकर्मियों ने दुर्गम और संवेदनशील परिस्थितियों में मोर्चा संभाला। कार्रवाई में घुरावाड़, बरबंधा और भुरसीडोंगरी के ग्रामीणों का भी सहयोग मिला।वन मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को मुक्त कराए गए क्षेत्र की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के साथ वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों में अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। Share This Article Post navigation 1.50 करोड़ ‘आशीर्वाद के दीयों’ से जगमगाया छत्तीसगढ़…गूंजा सेवा-संकल्प का संदेश हाईकोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, विजय बघेल की चुनाव याचिका खारिज करने की अर्जी नामंजूर