रायपुर 8 मार्च 2026/ ETrendingIndia / ‘Ger’ tradition has been going on since the time of Emperor Vikramaditya: Chief Minister Dr Mohan Yadav/ उज्जैन गेर परंपरा ,मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) में सम्राट विक्रमादित्य के समय सैनिक छावनियों से विजय ध्वज लेकर चल समारोह निकाला जाता था और इसी तरह उत्सव मनाया जाता था। समय के साथ इस परंपरा को ‘गेर’ नाम मिला, जो आज भी उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
महाकाल मंदिर में पूजन और ध्वज का विधि-विधान से पूजन
रविवार को रंगपंचमी के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान महाकाल का पूजन-अभिषेक कर देश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इसके बाद मंदिर के सभा मंडप में भगवान वीरभद्र के ध्वज, महाकाल ध्वज और शस्त्रों का विधि-विधान से पूजन किया गया।
मुख्यमंत्री ध्वज लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक भी गए। इस दौरान मंदिर के पुजारी-पुरोहितों ने स्वस्ति वाचन किया।
गेर की परंपरा बनाए रखने के लिए आर्थिक सहयोग
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले गेर (चल समारोह) को आगे भी जारी रखने के लिए सवा-सवा लाख रुपए की सहयोग राशि प्रदान की जाए, ताकि यह परंपरा निरंतर चलती रहे।
रंगपंचमी पर खेली फूलों की होली
रंगपंचमी के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उज्जैन के टॉवर चौक पर आम लोगों के साथ फूलों की होली खेली। इससे पहले वे सिंधी कॉलोनी से निकली गेर में भी शामिल हुए। लोगों ने उत्साह के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
‘ये देश है वीर जवानों का’ गीत से गूंजा उज्जैन
टॉवर चौक पर मंच से मुख्यमंत्री ने लोगों पर गुलाब के फूल बरसाए और सभी ने मिलकर ‘ये देश है वीर जवानों का’ गीत गाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सच्चे रंग भाईचारे, सम्मान और देशभक्ति के होते हैं। रंगपंचमी का यह पर्व प्रेम और आत्मीयता बढ़ाने का संदेश देता है।
रंगपंचमी के इस आयोजन में हजारों लोगों की भागीदारी से उज्जैन में मालवी संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली।
