Share This Article रायपुर, 21 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सैन्य तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई हो, लेकिन हाल ही में सार्वजनिक हुए कुछ ईमेल से दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर समन्वय का खुलासा हुआ है। इन दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने वर्ष 2025 और 2026 की शुरुआत में 100 से अधिक ईरानी नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित करने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय किया था।नेशनल ईरानी अमेरिकन काउंसिल की ओर से सार्वजनिक किए गए ईमेल में सितंबर और दिसंबर 2025 तथा जनवरी 2026 में ईरानी नागरिकों को निर्वासित करने के लिए की गई विमान व्यवस्था का उल्लेख है। ईमेल से संकेत मिलता है कि निर्वासित किए जाने वाले लोगों की सूची को लेकर अमेरिकी और ईरानी पक्षों के बीच बातचीत हुई थी। कुछ मामलों में ईरानी पक्ष के अनुरोधों को अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने अंतिम समय में स्वीकार भी किया।रिपोर्ट में एक अज्ञात अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि ईरानी दूतावास के अनुरोध पर कुछ लोगों के नाम निर्वासन की सूची में जोड़े गए थे। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि उन्होंने ईरानी दूतावास के एक निदेशक से मुलाकात की थी। अधिकारी के अनुसार, ईरानी पक्ष ने पिछली सूची में संशोधन करने और निर्वासन की प्रक्रिया को तेज करने का अनुरोध किया था।सितंबर 2025 में एक निर्वासन उड़ान के रवाना होने से केवल तीन दिन पहले तक ईरान की ओर से यात्रियों की सूची में बदलाव करने की मांग की जा रही थी।ईमेल में निर्वासन प्रक्रिया से जुड़ी एक और चौंकाने वाली घटना का भी उल्लेख है। एक ईरानी नागरिक का नाम अंतिम यात्री सूची में शामिल नहीं था, इसके बावजूद उसे विमान में सवार होने की अनुमति दे दी गई। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, कतर के गृह मंत्रालय को भेजी गई अंतिम सूची में नाम नहीं होने के बावजूद एक ईरानी नागरिक विमान में सवार हो गया। एक अन्य अधिकारी ने इस संबंध में कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि वह व्यक्ति विमान में किस तरह सवार हो गया। ईमेल से यह भी पता चलता है कि जून 2025 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चले 12 दिन के युद्ध के दौरान भी ईरानी नागरिकों का निर्वासन जारी रखने की कोशिश की गई थी।उस समय एक अमेरिकी आव्रजन अधिकारी ने चिंता जताई थी कि युद्ध के बीच ईरानी नागरिकों को वापस भेजना मुश्किल होगा। इसकी वजह यह थी कि ईरान यात्रा दस्तावेज जारी नहीं कर रहा था और उसका हवाई क्षेत्र भी बंद था। इसके बावजूद अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन के वरिष्ठ अधिकारी मार्कोस चार्ल्स ने 58 ईरानी नागरिकों के निर्वासन की योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। सार्वजनिक किए गए इन ईमेल से यह सवाल भी उठता है कि अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर राजनीतिक एवं सैन्य तनाव के बावजूद निर्वासन के मामलों में दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच किस स्तर तक संपर्क और समन्वय बना हुआ था।दस्तावेजों में यात्रियों की सूची में बदलाव, निर्वासन की प्रक्रिया में तेजी लाने और यात्रा व्यवस्था को लेकर हुए संवाद का उल्लेख है। इन घटनाओं से अमेरिकी निर्वासन प्रक्रिया में ईरानी पक्ष के संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। Share This Article Post navigation म्यांमार में बौद्ध मठ पर हवाई हमला, 14 लोगों की मौत; 20 घायल ममता सैन्य आयोजनों से दूर रहती थीं, शुभेंदु का मिल रहा है पूरा सहयोग: अमित शाह