Share This Article रायपुर, 26 जुलाई 2026/ USA Visa : अमेरिका में H-1B वीजा के जरिए नौकरी करने की तैयारी कर रहे भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी आईटी कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी संघीय अपील अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर (करीब ₹95 लाख) की अतिरिक्त फीस लागू करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। फिलहाल पुराने शुल्क के साथ ही वीजा आवेदन जारी रहेंगे। कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को दिया झटका बोस्टन की फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि इतनी बड़ी फीस बिना कांग्रेस की मंजूरी के नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने इसे कानूनी अधिकारों से परे कदम माना। क्यों लगाई गई थी इतनी भारी फीस ? ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि कुछ अमेरिकी कंपनियां कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए H-1B वीजा का अधिक इस्तेमाल करती हैं। 1 लाख डॉलर की फीस का उद्देश्य कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से हतोत्साहित करना था। भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए राहत H-1B वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलता है।प्रस्तावित भारी फीस लागू होने पर भारतीय प्रतिभाओं की भर्ती अमेरिकी कंपनियों के लिए काफी महंगी हो जाती। फिलहाल पुरानी फीस ही लागू अदालत के फैसले के बाद अंतिम सुनवाई पूरी होने तक ट्रंप प्रशासन नई ₹95 लाख (1 लाख डॉलर) फीस लागू नहीं कर सकेगा। यानी अभी H-1B वीजा के आवेदन पुरानी शुल्क व्यवस्था के तहत ही स्वीकार किए जाएंगे। H-1B वीजा क्यों है खास ? हर साल अमेरिका 85,000 H-1B वीजा जारी करता है, जिनमें 65,000 सामान्य कोटा और 20,000 अमेरिकी विश्वविद्यालयों से मास्टर डिग्री प्राप्त उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होते हैं। इस कोटे का बड़ा हिस्सा भारतीय पेशेवरों को मिलता है। बड़ी बात कोर्ट के फैसले से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों और अमेरिकी टेक कंपनियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है, जबकि H-1B वीजा शुल्क को लेकर कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी। Share This Article Post navigation Celebrations on Patriotic Songs : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न…! छात्रों ने बताई आंदोलन की बड़ी जीत SIR : देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण…! पात्र वोटरों की सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग के सख्त इंतजाम