Share This Article रायपुर, 13 सितंबर 2026। ETrendingIndia / 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम का हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण हजरत निजामुद्दीन-पलवल रूट पर किया गया। ट्रायल के दौरान ट्रेन ने 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल की। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाई-स्पीड परीक्षण में कवच सिस्टम का प्रदर्शन सफल रहा। इसके अलावा, लोको पायलट और स्टेशन के बीच संचार व्यवस्था भी सही तरीके से काम करती मिली। परीक्षण का उद्देश्य तेज रफ्तार पर सुरक्षा प्रणाली की क्षमता को परखना था। 50 किलोमीटर की दूरी करीब 40 मिनट में पूरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने हजरत निजामुद्दीन और पलवल के बीच करीब 50 किलोमीटर की दूरी लगभग 40 मिनट में पूरी की। ट्रेन करीब 1:38 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना हुई। इसके बाद यह लगभग 2:21 बजे पलवल पहुंची। फिर ट्रेन करीब 3:32 बजे दिल्ली के लिए वापस रवाना हुई। हालांकि, पूरे रूट पर ट्रेन 160 kmph की रफ्तार बरकरार नहीं रख सकी। इसका कारण फरीदाबाद मेन लाइन पर चल रहा विकास कार्य बताया गया है। फरीदाबाद के पास कम करनी पड़ी स्पीड विकास कार्य के चलते वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को कुछ हिस्से में लूप लाइन का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके कारण कई स्थानों पर ट्रेन की गति कम की गई। खासकर फरीदाबाद स्टेशन से गुजरते समय ट्रेन की स्पीड घटाई गई। इसके बावजूद हाई-स्पीड ट्रायल को सफल माना गया। कवच सिस्टम से बढ़ेगी रेल सुरक्षा कवच भारत में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। इसका उद्देश्य ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। हाई-स्पीड ट्रायल में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के साथ कवच सिस्टम की कार्यक्षमता की जांच की गई। सफल परीक्षण से इस ट्रेन की सुरक्षा क्षमता को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। 16 कोच की ट्रेन में क्या है खास? वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लंबी दूरी की यात्रा को अधिक आरामदायक बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें यात्रियों के लिए स्लीपर कोच की सुविधा दी गई है। Share This Article Post navigation मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात… रूस यात्रा का मिला न्योता ; शांति पर भारत का जोर माधुरी हथिनी की घर वापसी, 13 महीने बाद वंतारा से कोल्हापुर लौटी; लोगों ने फूल बरसाकर किया स्वागत