Share This Article वाराणसी, 25 अक्टूबर 2026। Wings Over Ganga : मां गंगा के ऐतिहासिक घाटों के ऊपर भारतीय लड़ाकू विमानों की गर्जना और रोमांचक हवाई करतबों ने काशी को गौरवपूर्ण दृश्य का साक्षी बनाया। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, स्वदेशी तेजस, मिराज-2000 और जगुआर समेत कई विमानों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को देखा। हेलीकॉप्टरों की विशेष फॉर्मेशन, लड़ाकू विमानों के करतब और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम के प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। सारंग टीम के प्रदर्शन से हुई शुरुआत एयर शो की शुरुआत भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के समन्वित हवाई करतबों से हुई। इसके बाद तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की ‘ओंकार’ फॉर्मेशन ने राष्ट्रीय ध्वज और वायुसेना के ध्वज के साथ उड़ान भरी। ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता के नेतृत्व में प्रस्तुत इस फॉर्मेशन ने समारोह में देशभक्ति और आध्यात्मिकता का संगम दिखाया। इसके बाद ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने उड़ान भरी। इस दौरान हेलीकॉप्टरों से पुष्प वर्षा की गई। गंगा के ऊपर फूलों की वर्षा का दृश्य समारोह के भावपूर्ण क्षणों में शामिल रहा। सुखोई, अपाचे और अन्य विमानों ने दिखाई ताकत कार्यक्रम के दौरान सुखोई-30 एमकेआई ने अपनी तेज उड़ान और परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके साथ वायुसेना की खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही क्षमताओं को भी प्रस्तुत किया गया। ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों के समन्वित प्रदर्शन ने आधुनिक सैन्य अभियानों में हेलीकॉप्टरों की भूमिका को रेखांकित किया। ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के कामोव-31 और वायुसेना तथा थलसेना के एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टरों ने संयुक्त प्रदर्शन किया। इसके अलावा ‘अलकनंदा’, ‘भैरव’, ‘कैलाश’ और ‘त्रिलोचन’ जैसी फॉर्मेशन में परिवहन विमानों, निगरानी प्रणालियों और लड़ाकू विमानों की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया। राफेल और तेजस के करतबों ने बढ़ाया रोमांच एयर शो में तीन राफेल लड़ाकू विमानों की ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन ने आधुनिक युद्धक विमानन क्षमता का प्रदर्शन किया। वहीं, ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई और ‘पशुपति’ फॉर्मेशन में चार जगुआर विमानों ने समन्वित उड़ान का परिचय दिया। ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में सुखोई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, तेजस और मिग-29 जैसे विभिन्न लड़ाकू विमानों को एक साथ प्रदर्शित किया गया। स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस का एकल प्रदर्शन भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। विमान ने नियंत्रित रोल, तीव्र मोड़ और अन्य हवाई करतबों के जरिए अपनी फुर्ती और उड़ान नियंत्रण क्षमता दिखाई। तेजस का प्रदर्शन देश में विकसित रक्षा तकनीक और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को सामने लाने का अवसर बना। काल्पनिक हवाई युद्ध से समझाई गई युद्धक रणनीति कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों के जरिए एक काल्पनिक हवाई युद्ध का प्रदर्शन भी किया गया। इसमें जगुआर विमानों को जमीनी लक्ष्य पर हमले की भूमिका में रखा गया, जबकि सुखोई विमानों ने उन्हें रोकने और विरोधी विमानों को निष्क्रिय करने की भूमिका निभाई। इस प्रस्तुति ने लक्ष्य की पहचान, निगरानी, सामरिक निर्णय और पायलटों के बीच समन्वय के महत्व को दर्शाया। प्रदर्शन के दौरान ब्रह्मोस, स्कैल्प और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी संदर्भ दिया गया। ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए वायुसेना की परिचालन तैयारी और सटीक प्रहार क्षमता को रेखांकित किया गया। सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन के साथ समापन एयर शो के अंतिम चरण में सी-17 ग्लोबमास्टर और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने दर्शकों को रोमांचित किया। ग्रुप कैप्टन अजय दशरथ के नेतृत्व में नौ हॉक विमानों की सूर्य किरण टीम ने एक साथ उड़ान भरते हुए विभिन्न आकृतियां बनाईं और सटीक तालमेल के साथ हवाई करतब प्रस्तुत किए। टीम ने फॉर्मेशन फ्लाइंग, फ्लावर और बैरल रोल जैसे प्रदर्शन किए। विमानों की एक साथ दिशा बदलने और आसमान में सममित आकृतियां बनाने की क्षमता ने दर्शकों को प्रभावित किया। ‘विंग्स ओवर गंगा’ ने भारतीय वायुसेना की उड़ान दक्षता, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और राष्ट्र सेवा के संकल्प को प्रदर्शित करने के साथ काशी की आध्यात्मिक विरासत को भी विशेष पहचान दी। Share This Article Post navigation Kargil Hero Naik Deepchand: कारगिल में गंवाए दोनों पैर और एक हाथ…फिर भी नहीं हारा हौसला…! जानिए आज कैसी जिंदगी जी रहे हैं वीर योद्धा नायक दीपचंद…यहां देखें VIDEO