World Environment Day 2026: Return closer to nature Modern-look clay pots made the center of attraction…! Raipur startup gives inspiring message to save environment /
World Environment Day 2026 : जब पूरी दुनिया पर्यावरण बचाने की बात कर रही है, तब रायपुर का एक युवा स्टार्टअप प्लास्टिक के खिलाफ एक शांत लेकिन मजबूत क्रांति छेड़ रहा है। पेट्रोलियम से बने उत्पादों की बढ़ती खपत और पर्यावरण पर उसके खतरे को देखते हुए युवा उद्यमी विपिन गुप्ता लोगों को प्लास्टिक के गमलों की जगह पारंपरिक मिट्टी के गमले अपनाने का संदेश दे रहे हैं।

खास चमक और आकर्षक पॉलिश वाले ये मिट्टी के गमले सिर्फ पौधों की खूबसूरती नहीं बढ़ाते, बल्कि प्रकृति को बचाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो रहे हैं।
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर यह पहल लोगों को एक बार फिर प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा दे रही है।
पौधारोपण के नाम पर बढ़ रहा प्लास्टिक कचरा
स्टार्टअप चिन्हारी को शुरू करने वाले विपिन गुप्ता का कहना है कि आज देश तेजी से ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है। पेट्रोलियम से बने उत्पादों की खपत लगातार बढ़ती जा रही है और अब तो घरों में इस्तेमाल होने वाले झाड़ू तक प्लास्टिक के बनने लगे हैं। ऐसे में हम धीरे-धीरे प्राकृतिक , परम्परा और पर्यावरण मित्र उत्पादों को अपनी जिंदगी से दूर कर रहे हैं।
विडंबना यह है कि जिस पर्यावरण दिवस पर लोग हजारों पौधे लगाते हैं, उसी दिन प्लास्टिक के हजारों गमले भी खरीदे जाते हैं। यानी एक तरफ हम पर्यावरण बचाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की खपत भी बढ़ाते जा रहे हैं।

मिट्टी के ये गमले अपनी खास चमक और पॉलिश के लिए भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। ये गमले न सिर्फ पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि पौधों की बेहतर ग्रोथ में भी मददगार माने जाते हैं।
निश्चित ही ‘अगर हम प्लास्टिक की जगह मिट्टी से बने परम्परागत गमले अपनाएं, तो यह छोटा सी पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।’
मिट्टी के गमले अपनाना सिर्फ पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक कारीगरी और स्थानीय कुम्हारों को बढ़ावा देने का भी माध्यम है। जब हम मिट्टी के उत्पाद खरीदते हैं, तब हम ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी कला को भी मजबूती देते हैं।

आज जरूरत इस बात की है कि हम हर घर, हर बगीचा और हर पौधारोपण अभियान में प्लास्टिक की जगह मिट्टी के गमले उपयोग किए जाएं, तो यह छोटा सा बदलाव आने वाले समय में बड़ा सकारात्मक असर ला सकता है।
पर्यावरण दिवस के मौके पर यह पहल लोगों को प्रकृति के करीब लौटने और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने का संदेश दे रही है।

