डेस्क रिपोर्ट, 29 जुलाई। World Heritage : भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर एक और बड़ी पहचान मिल गई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में शामिल कर लिया गया है। यह निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में लिया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है।
सारनाथ के साथ पुरातात्विक अवशेष (Archaeological Remains) और चौखंडी स्तूप को भी विश्व धरोहर का दर्जा मिला है। यही वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना प्रथम उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिया था। इसलिए यह स्थल दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखता है।
यूनेस्को की इस मान्यता से सारनाथ की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व मंच पर नई प्रतिष्ठा मिलेगी।
इस उपलब्धि के साथ भारत में UNESCO World Heritage Sites की संख्या बढ़कर 45 हो गई है। अब भारत विश्व में छठे और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जहां सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं।
यहीं बुद्ध ने दिया था पहला उपदेश
सारनाथ वही पवित्र स्थल है, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश (धम्मचक्र प्रवर्तन) दिया था। यहीं से बौद्ध संघ की स्थापना हुई और आर्य अष्टांगिक मार्ग का संदेश दुनिया तक पहुंचा।
सारनाथ की प्रमुख धरोहरें
धमेक स्तूप– बुद्ध के प्रथम उपदेश की स्मृति में निर्मित।
चौखंडी स्तूप– जहां बुद्ध अपने पहले शिष्यों से मिले।
अशोक स्तंभ– जिसका सिंह शीर्ष आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। प्राचीन मठ, विहार, मंदिर और पुरातात्विक अवशेष।
क्या है UNESCO World Heritage Convention?
- 1972 में UNESCO ने विश्व सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत संरक्षण सम्मेलन अपनाया।
- 1975 में यह लागू हुआ।
- भारत ने 1977 में इस सम्मेलन की पुष्टि की।
- इसका उद्देश्य विश्व की उत्कृष्ट सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की पहचान, संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें सुरक्षित पहुंचाना है।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?
सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से भारत की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और मंगोलिया जैसे बौद्ध देशों के साथ सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही धार्मिक पर्यटन, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक कूटनीति को भी नया बल मिलेगा।
