Share This Article रायपुर, 25 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। हालांकि, चीन की ओर से अभी तक उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि शी जिनपिंग की भारत यात्रा की पुष्टि होती है, तो यह करीब सात वर्षों बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार और लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग के साथ करीब 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आने की संभावना है। यह संख्या वर्ष 2019 में उनकी पिछली भारत यात्रा के दौरान आए 200 से कम अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल की तुलना में काफी अधिक होगी। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने अभी तक राष्ट्रपति शी के भारत दौरे के कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा नहीं की है। इसके बावजूद उनके संभावित दौरे को लेकर तैयारियां शुरू होने की बात कही जा रही है। चीनी विदेश मंत्रालय ने ब्रिक्स सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि चीन इस व्यवस्था को महत्व देता है और इसमें सक्रिय रूप से भाग लेता है। चीन ने ब्रिक्स की मेजबानी कर रहे भारत के प्रयासों का समर्थन करने की बात भी कही है। पिछले कुछ समय से भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों को दोबारा मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत का सिलसिला भी आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले वर्ष चीन की यात्रा कर चुके हैं। इसके अलावा भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी हाल ही में बीजिंग का दौरा किया था। इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भारत और चीन के संबंधों में जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इस घटना में 20 भारतीय सैनिक और चार चीनी सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तैनाती की गई थी। अक्टूबर 2024 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच कुछ क्षेत्रों से पीछे हटने को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्क बढ़े हैं। हालांकि, सीमा विवाद सहित कई रणनीतिक और राजनीतिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में यदि शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच संभावित मुलाकात पर विशेष नजर रहेगी। दोनों नेताओं के बीच बातचीत से सीमा विवाद, द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद की जा सकती है। Share This Article Post navigation अजित डोभाल ने बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से की मुलाकात, सीमा पर शांति और स्थिरता पर जोर इजरायल की पतंग और गुब्बारों को लेकर हमास को भीषण हमलों की चेतावनी