Yuva Dharm Sansad 2026Yuva Dharm Sansad 2026
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उज्जैन, 19 सितंबर 2026। Yuva Dharm Sansad 2026 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म को केवल धार्मिक अनुष्ठानों या वृद्धावस्था तक सीमित नहीं रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवावस्था से ही धर्म को जीवन के आचरण, निर्णय और सामाजिक जिम्मेदारियों का आधार बनाना चाहिए। वे शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय ‘युवा धर्म संसद-2026 अवन्तिका’ के शुभारंभ अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे।

धर्म का अर्थ केवल रिलीजन या पूजा-पद्धति नहीं

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म का अर्थ केवल ‘रिलीजन’ या किसी विशेष पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है। उन्होंने ‘धर्म’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह ‘धृ’ धातु से बना है, जिसका अर्थ धारण करना है।

उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने तथा उन्हें निरंतर उन्नति की दिशा में ले जाने वाला अनुशासन है। उनके अनुसार धर्म को जीवन के व्यवहार और जिम्मेदारियों में उतारना जरूरी है।

सत्य, करुणा, शुचिता और तप को बताया आधार

मोहन भागवत ने सत्य, करुणा, शुचिता और तप को मानवीय धर्म का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति और व्यक्तिगत सफलता महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन भी आवश्यक है।

उन्होंने युवाओं से अपने व्यक्तिगत विकास के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझने और अपने आचरण में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की बात कही।

यातायात नियमों से स्वच्छता तक, रोजमर्रा का व्यवहार भी धर्म

संघ प्रमुख ने धर्म को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ते हुए कहा कि सड़क पर यातायात नियमों का पालन करना, कचरा नहीं फैलाना, दूसरे व्यक्ति को कष्ट नहीं देना और अपने कर्तव्यों का पालन करना भी धर्म के आचरण का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि धर्म की वास्तविक पहचान केवल धार्मिक गतिविधियों में नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और उसके सामाजिक आचरण में दिखाई देती है।

25 राज्यों से पहुंचे 1600 युवा

तीन दिवसीय युवा धर्म संसद-2026 में देश के 25 राज्यों से करीब 1600 युवा शामिल हुए हैं। आयोजन में युवाओं के साथ 300 से अधिक शिक्षाविद, शिक्षक, शोधकर्ता, विद्वान और धर्माचार्य भी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, शिक्षा, तकनीक, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर संवाद किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को इन विषयों पर विचार-विमर्श और संवाद का मंच उपलब्ध कराना है।


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