रायपुर 19 नम्बर 2025/ ETrendingIndia / The growing popularity of ‘Kala Namak’ rice in eastern Uttar Pradesh, with demand for special varieties also rising in Madhya Pradesh and Chhattisgarh / काला नमक धान की बढ़ती लोकप्रियता , सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध पूर्वी उत्तर प्रदेश का ‘काला नमक’ चावल अब किसानों के लिए आर्थिक संबल बनता जा रहा है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना में शामिल होने और GI टैग मिलने के बाद इस पारंपरिक धान की मांग तेजी से बढ़ी है।
बस्ती, संत कबीरनगर, सिद्धार्थनगर सहित 11 जिलों में इसकी खेती का रकबा हाल के वर्षों में कई गुना बढ़ा है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार अब तक लगभग 80,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में काला नमक धान की खेती हो रही है, जबकि कुछ वर्ष पूर्व यह रकबा 20–25 हजार हेक्टेयर के आसपास था।
किसानों की आय में बढ़ोतरी
किसानों का कहना है कि काला नमक धान पारंपरिक धानों की तुलना में बेहतर दाम दिलाता है। इसके प्रति क्विंटल के दाम सामान्य चावल से कहीं अधिक मिलते हैं। उच्च सुगंध, खनिजीय गुण और बेहतर बाजार मांग इसकी खेती को आकर्षक बना रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस धान में जिंक और आयरन की मात्रा अधिक होने से यह पोषण के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
सरकार की पहल बनी मददगार
उत्तर प्रदेश सरकार काला नमक धान को बढ़ावा देने के लिए बीज उपलब्धता, प्रशिक्षण, एफपीओ गठन और मार्केट लिंकिंग पर जोर दे रही है। सरकार ने अरपा, महराजगंज और आसपास के जिलों में प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया है, जिससे किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने में मदद मिली है। ऑनलाइन बिक्री, ई-मार्केट और निर्यातकों की दिलचस्पी ने भी इस धान की कीमत और मांग बढ़ाई है।
मध्य प्रदेश में बढ़ी सुगंधित धानों की खेती
काला नमक धान भले यूपी का विशेष ब्रांड हो, लेकिन मध्य प्रदेश में भी सुगंधित व विशेष किस्मों वाले चावलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। बासमती 370, पुंगनूर, शरबती, चिन्नौर,माखन शाह जैसी प्रीमियम किस्में किसानों के लिए बड़ा आकर्षण बनी हैं।
कृषि विभाग का कहना है कि नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, दमोह और होशंगाबाद क्षेत्रों में इन किस्मों की पैदावार और बाजार भाव दोनों बेहतर मिल रहे हैं, जिसके चलते किसान पारंपरिक मोटे धान से हटकर स्पेशल वैराइटी की ओर बढ़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़: ‘धान का कटोरा’ भी दे रहा विशेष किस्मों को बढ़ावा
छत्तीसगढ़, जो देश में धान उत्पादन में अग्रणी राज्य है, अब पारंपरिक मोटे धानों के अलावा विशेष किस्मों की खेती पर जोर दे रहा है।
राज्य में इन खास किस्मों का उत्पादन बढ़ रहा है— छत्तीसगढ़ी जेएस-2, दंतेश्वरी चावल,लाल चावल, कुडुख चावल, जवां फूल, दुबराज, विष्णु भोग, हंसीराज आदि।
राज्य सरकारे मिलिंग और मार्केटिंग के लिए नई नीतियों पर काम कर रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसान विशेष किस्मों की ओर आकर्षित हुए हैं। प्रीमियम किस्मों का बढ़ता रुझान देश में विशेष चावलों के उत्पादन को नई दिशा दे रहा है। इससे किसानों की आय में सुधार, राज्य की ब्रांड पहचान मजबूत होने और निर्यात की संभावनाएं बढ़ी हैं।
किसानों की रुचि, सरकारी योजनाओं का सहयोग और बढ़ती बाजार मांग—इन तीनों ने मिलकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के काला नमक धान को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है।
