Share This Article रायपुर, 21 दिसम्बर 2025 / ETrendingIndia / From Soil to Destination: Bastar’s Daughters Create National History / बस्तर की महिला किसान , कभी बस्तर की पहचान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों से होती थी, लेकिन आज वही बस्तर अपनी मेहनती महिलाओं के दम पर राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान बना रहा है। खेती को आत्मनिर्भरता का साधन बनाकर बस्तर की दो महिला किसानों ने वह कर दिखाया, जो लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया। बस्तर जिले के बकावंड जनपद की छिंदगांव निवासी सुमनी कश्यप और करीतगांव की नेत्री बाई कश्यप को नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया–2025 जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में जब बस्तर की इन महिलाओं का नाम पुकारा गया, तो पूरे छत्तीसगढ़ का सिर गर्व से ऊँचा हो गया। दोनों महिलाएं बिहान योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक सोच से जोड़ते हुए नए प्रयोग किए—बेहतर फसल चयन, उन्नत तकनीक, और बाजार की समझ को अपनाया। बस्तर की महिला किसान , सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने गांव में रहकर संघर्ष किया और खेती को लाभकारी उद्यम में बदला। कृषि जागरण द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री अजय मिश्रा टेनी और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने उन्हें सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर किसानों को “अन्नदाता” और “मिट्टी को सोना बनाने वाला” बताते हुए उनके योगदान की सराहना की गई। दिल्ली प्रवास के दौरान सुमनी और नेत्री बाई ने आधुनिक कृषि तकनीक, कृषि स्टार्टअप, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़े सत्रों में भाग लिया। बस्तर की इन बेटियों की सफलता यह साबित करती है कि अगर हौसला हो, तो सीमाएँ बाधा नहीं बनतीं। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल है, बल्कि गांवों में रहकर आत्मनिर्भर बनने का संदेश भी देती है। आज बस्तर की महिलाएं केवल खेत नहीं सींच रहीं—वे भविष्य गढ़ रही हैं। Share This Article Post navigation खेत से खुशहाली तक : धान की बेहतर कीमत ने बदल दी युगल किशोर की ज़िंदगी तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन से बदली खेती की तस्वीर : आत्मनिर्भरता की मिसाल बने श्री सतीश पाठक