रायपुर 3 जनवरी 3026 / ETrendingIndia / स्वदेशी मछली प्रजाति संवर्धन से टिकाऊ मत्स्य विकास की दिशा
केंद्र सरकार ब्लू रिवोल्यूशन के तहत स्वदेशी मछली प्रजाति संवर्धन को नई प्राथमिकता दे रही है। इसका उद्देश्य टिकाऊ मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है। साथ ही, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना भी लक्ष्य है।
भारत की नदियों, झीलों और समुद्री क्षेत्रों में समृद्ध जलीय जैव विविधता मौजूद है। इस कारण स्वदेशी प्रजातियाँ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
सीमित प्रजातियों पर निर्भरता बनी चुनौती
हालांकि, देश में 80 से अधिक व्यावसायिक मछली प्रजातियों की तकनीक उपलब्ध है। फिर भी, उत्पादन कुछ चुनिंदा प्रजातियों तक सीमित है। उदाहरण के लिए, मीठे पानी में भारतीय प्रमुख कार्प का प्रभुत्व है।
इसी तरह, खारे पानी में एक विदेशी झींगा प्रजाति पर निर्भरता अधिक है। इसलिए, स्वदेशी मछली प्रजाति संवर्धन को आवश्यक माना गया है।
उच्च क्षमता वाली स्वदेशी प्रजातियों पर फोकस
इस समस्या के समाधान के लिए कई स्वदेशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें पाबदा, सिंघी, स्ट्राइप्ड मुरेल, एशियन सीबास और इंडियन व्हाइट श्रिम्प शामिल हैं।
इन प्रजातियों की ब्रीडिंग तकनीक पहले से उपलब्ध है। इस कारण बड़े स्तर पर इन्हें अपनाना आसान होगा।
सरकारी योजनाओं से मिलेगा व्यापक समर्थन
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित कई योजनाओं के तहत सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, बीज, चारा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर भी जोर है।
अंततः, स्वदेशी मछली प्रजाति संवर्धन से आत्मनिर्भर मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, यह पहल जैव संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
