रायपुर 12 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / The supply of “Queen of Fishes: Hilsa” has shifted from Gujarat, yet the craze continues in Bengal / गुजरात की हिलसा मछली , बंगाल की पहचान मानी जाने वाली हिलसा मछली (इलिश) की आपूर्ति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों तक बांग्लादेश की पद्मा नदी और पश्चिम बंगाल की स्थानीय नदियों से आने वाली हिलसा अब नर्मदा समेत गुजरात की नदियों से बड़ी मात्रा में कोलकाता के बाजारों तक पहुँच रही है।
हाल के वर्षों में गुजरात हिलसा का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, जिससे बंगाल के बाजारों में इसकी उपलब्धता बनी हुई है।
हिलसा की खासियत
हिलसा अपने खास स्वाद, मुलायम कांटों और सुगंधित तेल के लिए जानी जाती है। मानसून के मौसम में जलप्रवाह की विपरीत दिशा में तैरती हुई समुद्र से नदी में आने वाली यह मछली सबसे स्वादिष्ट मानी जाती है। सरसों के तेल में पकी हिलसा बंगाली भोजन का अभिन्न हिस्सा है और इसे “मछलियों की रानी” कहा जाता है।
बंगाल में मांग और बाजार
दुर्गा पूजा से लेकर सावन-भादो तक पश्चिम बंगाल में हिलसा की मांग चरम पर रहती है। कोलकाता, हावड़ा, सियालदह और सॉल्ट लेक के बाजारों में रोजाना हजारों खरीदार इसकी तलाश में रहते हैं। व्यापारियों के अनुसार, गुजरात की हिलसा ने आपूर्ति की कमी को काफी हद तक पूरा किया है, हालांकि पारंपरिक पद्मा हिलसा की मांग अब भी अलग बनी हुई है।
कीमत का हाल
आकार और गुणवत्ता के अनुसार हिलसा की कीमतों में बड़ा अंतर है। सामान्य आकार की गुजरात हिलसा 1,200 से 2,500 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है, जबकि बड़ी और अधिक तेलयुक्त मछली की कीमत 3,000 रुपये प्रति किलो तक पहुँच जाती है। वहीं, सीमित मात्रा में उपलब्ध पद्मा हिलसा की कीमतें 4,000 से 6,000 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की जा रही हैं।
कुल मिलाकर, आपूर्ति के नए स्रोतों के बावजूद हिलसा का स्वाद और उसकी सांस्कृतिक अहमियत बंगाल में जस की तस बनी हुई है।
