From barren land to a green future
From barren land to a green future
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रायपुर 12 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / From barren land to a green future: Extensive tree planting in mining dumps creates a green cover / माइनिंग डंप में वृक्षारोपण , जहाँ कभी कोयला खदानों का मलबा, पत्थर और अपशिष्ट फैले थे, आज वहीं हरियाली की चादर बिछी है। छत्तीसगढ़ के कोरबा के गांधीसागर माइनिंग डंप क्षेत्र में किया गया वृक्षारोपण यह साबित करता है कि यदि संकल्प मजबूत हो और प्रयास वैज्ञानिक हों, तो बंजर भूमि भी हरित भविष्य का आधार बन सकती है।

यह सफलता छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम और एसईसीएल की संयुक्त पर्यावरणीय पहल का जीवंत उदाहरण है।

चुनौती को अवसर में बदला

खनन के बाद बने डंप क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता, नमी और जैविक तत्वों की भारी कमी होती है। ऐसे कठिन हालात में वृक्षारोपण किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन निगम के विशेषज्ञों ने डंप पर 20 से 30 सेंटीमीटर उपजाऊ मिट्टी बिछाकर जीवन के लिए अनुकूल आधार तैयार किया और असंभव को संभव बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

गांधीसागर डंप बना हराभरा जंगल

वर्ष 2019 में चयनित गांधीसागर डंप के 19 हेक्टेयर क्षेत्र में 47,500 पौधों का रोपण किया गया। पथरीली और कोयला अपशिष्ट से भरी भूमि आज सघन, मानव -निर्मित जंगल का रूप ले चुकी है। यहाँ पक्षियों की चहचहाहट, गिलहरियों और सियार जैसे वन्य प्राणियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि जैव विविधता फिर से लौट आई है।

वैज्ञानिक तकनीक और सतत देखरेख

एसईसीएल और वन विकास निगम की टीम ने जीपीएस सर्वे, सीमांकन, फेंसिंग और निर्धारित दूरी पर गड्ढे खोदकर नीम, शीशम, सिरिस, कचनार, बांस, आंवला जैसे उच्च गुणवत्ता वाले पौधे लगाए। पाँच वर्षों तक नियमित सिंचाई, खाद, सुरक्षा और मृत पौधों के प्रतिस्थापन ने इस प्रयास को सफलता की ऊँचाई तक पहुँचाया।

बंजर से हरित प्रेरणा

2019 से 2024 तक की सतत देखरेख के बाद यह क्षेत्र एसईसीएल को सौंप दिया गया। आज गांधीसागर डंप यह संदेश देता है—जहाँ था खनन अपशिष्ट, वहाँ अब है हरियाली। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की सफलता की कहानी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा भी है कि सही योजना और सहयोग से उजड़ी भूमि को भी जीवन से भरपूर जंगल में बदला जा सकता है।