रायपुर 23 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / क्या है ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस पहल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा की थी।
पहले यह पहल गाजा युद्ध समाप्त करने के लिए लाई गई। इसके बाद इसका दायरा वैश्विक संघर्षों तक बढ़ा दिया गया।
और ट्रंप स्वयं इसके पहले अध्यक्ष होंगे।
बोर्ड की संरचना और शक्तियां
ड्राफ्ट चार्टर के अनुसार ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य दुनिया में शांति स्थापित करना है।
सदस्य देशों का कार्यकाल तीन वर्ष होगा।
लेकिन यदि कोई देश एक अरब डॉलर का योगदान देता है, तो उसे स्थायी सदस्यता मिल सकती है।
इस कारण यह पहल संयुक्त राष्ट्र के लिए चुनौती मानी जा रही है।
किन देशों ने ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस को समर्थन दिया
अब तक करीब 35 देशों ने ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की सहमति दी है।
इनमें इजरायल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, मिस्र और जॉर्डन शामिल हैं।
इसके अलावा तुर्की, हंगरी, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, वियतनाम और बेलारूस भी जुड़े हैं।
उदाहरण के लिए, आर्मेनिया और अजरबैजान ने शांति समझौते के बाद भागीदारी की।
किन देशों ने दूरी बनाई या अभी निर्णय नहीं लिया
हालांकि कई अमेरिकी सहयोगी देशों ने इस पहल पर सतर्क रुख अपनाया है।
नॉर्वे और स्वीडन ने शामिल होने से इनकार किया है।
फ्रांस ने भी दूरी बनाई, जबकि कनाडा ने सैद्धांतिक सहमति दी है।
यूक्रेन ने कहा कि रूस के साथ एक ही मंच पर बैठना मुश्किल है।
अंत में, रूस और चीन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और विवाद
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस को गाजा तक सीमित भूमिका दी है।
हालांकि ट्रंप ने कहा कि यह बोर्ड यूएन का विकल्प नहीं होगा।
कुल मिलाकर, यह पहल वैश्विक राजनीति में नई बहस और कूटनीतिक तनाव पैदा कर रही है।
