Rudraksha Mahotsav
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रायपुर 17 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Storyteller Dhirendra Shastri participated in the grand Rudraksha Mahotsav: Pandit Pradeep Mishra said – do not get involved with Babas, stay in the shelter of God. रुद्राक्ष महोत्सव कुबेरेश्वरधाम , हम दुनिया के भरोसे पर जीते हैं पर परमात्मा के भरोसे नहीं जी पाते, हम उसके आश्रित नहीं हो पाते। कभी ऐसा भी होता है कि हमारा पुण्य भी पाप में बदल जाता है। बाबाओं के चक्कर में न पड़कर भगवान शिव की शरण में रहें। भगवान पर किया गया भरोसा ही सार्थक होता है।

यह विचार कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय रुदाक्ष महोत्सव के अंतर्गत संगीतमय भव्य शिव महापुराण के तीसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने व्यक्त किए।

श्रद्धालुओं को शिव भक्ति के लिए प्रेरित करते हुए पं. मिश्रा ने कहा कि ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। श्रद्धा के साथ रोजाना भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करें, एक लोटा जल सारी समस्याओं का हल है। इसके बाद पूरा आयोजन स्थल तालियों और हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

उन्होंने कहा कि किसी के कुछ करने से किसी का बुरा नहीं होता, बल्कि पूर्व में हमने जो कर्म किए हैं उसके अनुसार ही हमें फल मिलता है। इस दुनिया के ढोंग और प्रपंच से बाहर हो जाओ।

कुबेरेश्वर धाम की पावन धरा पर आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के सोमवार को श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा की शुरुआत सुमधुर भजन ‘कर्म तुम्हारा जरूर होगा’ और गुरु वंदना के साथ हुई।

कथा के तीसरे दिन मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सीहोर जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर भी उपस्थित रहे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पंडित श्री मिश्रा द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों (अस्पताल, भोजनालय) की सराहना करते हुए कहा कि पहले सीहोर अपनी कचौरी के लिए प्रसिद्ध था लेकिन आज पंडित प्रदीप मिश्रा की भक्ति के कारण वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने नम: शिवाय के जाप के साथ शिव महिमा का वर्णन किया। उन्होंने प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला।

शिवोहम का दर्शन: पंडित जी ने कहा कि शिव कहीं बाहर नहीं, बल्कि हर कंकड़ और मनुष्य की हर रोमावली में निवास करते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि दूसरे बाबाओं के पैर छूने से पहले एक बार स्वयं के पैर छुओ, क्योंकि तुम्हारे भीतर भी शिव का अंश है।

भाग्य और महादेव: पंडित जी ने स्पष्ट किया कि भाग्य लिखना विधाता का काम है, लेकिन उस भाग्य को बदलने की शक्ति केवल महाकाल बाबा में है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से नाता मन का होना चाहिए, दिखावे का नहीं।

विश्वास की पराकाष्ठा (असंभव को संभव): कथा के दौरान एक मर्मस्पर्शी पत्र पढ़ा गया, जिसमें एक महिला ने बताया कि डॉक्टरों द्वारा मना करने के बाद भी कुबेरेश्वर धाम की मिट्टी और एक लोटा जल के विश्वास से उन्हें 20 साल बाद संतान सुख प्राप्त हुआ। पंडित जी ने इसे ‘आस्था का चमत्कार’ बताया।

शरण और चरण का अंतर: पंडित श्री मिश्रा ने समझाया कि माता-पिता और गुरु के चरणों में हमेशा बैठना कठिन है, लेकिन उनके बताए मार्ग और शरण में रहना सरल है। जो शिव की शरण में है, उसकी चिंता स्वयं महादेव करते हैं।

सती चरित्र और शिव-पार्वती विवाह
कथा के प्रसंग में माता सती के बाल्यकाल और उनके दृढ़ निश्चय का वर्णन किया गया। पंडित श्री मिश्रा ने बताया कि कैसे अपमानित होने के बाद भी सती जी ने पत्थर की मूर्ति में परमात्मा को प्रकट कर लिया और शिव को वर के रूप में चुना। उन्होंने कहा कि ‘हमारा सनातन धर्म पत्थर में भी परमात्मा प्रकट करने की सामर्थ्य रखता है।

कथा का समापन सती माता के त्याग और पुन: पार्वती रूप में जन्म लेकर शिव से मिलन की दिव्य झांकी और आरती के साथ हुआ।

पंडित जी ने प्रकृति संरक्षण के लिए पौधारोपण करने वालों को धन्यवाद दिया और गौ-सेवा व 351 कमरों की निर्माणाधीन धर्मशाला में सहयोग की अपील की। उन्होंने भक्तों से भीषण गर्मी को देखते हुए बार-बार पानी पीते रहने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने का विशेष आग्रह किया।

बागेश्वरधाम के कथा वाचक धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचें कुबेरेश्वरधाम

सनातन धर्म को जन-जन तक पहुचाने का संकल्प लेकर निरंतर आगे बढ़ने वाले इस कलियुग में शिव युग लाने वाले अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा आयोजित भव्य रुद्राक्ष महोत्सव में मंगलवार को बागेश्वरधाम के कथा वाचक धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचें।

इसके अलावा 19 फरवरी को कथा वाचक देवकीनंद ठाकुर और 20 फरवरी को 18 पुराणों से धर्म को जागरूक करने वाले कौशिक महाराज शामिल रहेंगे।