Khiwani Sanctuary
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रायपुर 24 अप्रैल 2026 / ETrendingIndia / Khiwani Sanctuary to become ideal model of wildlife conservation and eco-tourism: CM / खिवनी अभयारण्य इको टूरिज्म , मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक रूप से बाघों की बढ़ती मौजूदगी के कारण खिवनी वन्य-प्राणी अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण की सफलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विजन खिवनी को एक सुदृढ़ बाघ आवास के साथ-साथ प्रमुख इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करना है, जिससे संरक्षण और पर्यटन दोनों को नई दिशा मिलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिवनी आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का आदर्श केंद्र बनेगा।

बाघों के सुरक्षित प्रजनन स्थल के रूप में स्थापित

मालवा-निमाड़ क्षेत्र के शुष्क पर्णपाती वनों में स्थित लगभग 134.7 वर्ग किलोमीटर में फैला खिवनी अभयारण्य, जो पहले केवल रातापानी जैसे बड़े वनों को जोडऩे वाला ‘ट्रांजिट कॉरिडोरÓ माना जाता था, आज बाघों के सुरक्षित प्रजनन स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस परिवर्तन को राज्य की सुनियोजित नीतियों और सतत संरक्षण प्रयासों का परिणाम बताया।

मीरा ने दिया तीन शावकों को जन्म

खिवनी में बाघ ‘युवराजÓ और ‘मीराÓ ने इसे अपना स्थायी ठिकाना बनाकर नई पहचान दी है। वन विभाग द्वारा मीरा के तीन शावकों को जन्म देने की पुष्टि की गई है। ये शावक अब अपनी मां के साथ जंगल में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

वर्तमान में खिवनी में लगभग एक दर्जन बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है, जो इस क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्जीवन का स्पष्ट संकेत है।

खिवनी में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियां, जैसे जंगली कुत्तों (ढोल) की सक्रियता, तेंदुए, लकड़बग्घा, सियार और भालू की उपस्थिति तथा चौसिंगा जैसे दुर्लभ शाकाहारी जीवों की मौजूदगी ने इसे संतुलित शिकार-शिकारी श्रृंखला और सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र के पुनस्र्थापना का उदाहरण बना दिया है।

खिवनी का विस्तार सीहोर के वन क्षेत्र तक

खिवनी वन्यजीव संरक्षण की नींव 1982 में रखी गई थी। बाद में खिवनी क्षेत्र का विस्तार कर सीहोर जिले के वन क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया। अब यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा सिद्ध हो रहा है।

राज्य सरकार अब ओंकारेश्वर वन्य-प्राणी अभयारण्य के विकास के माध्यम से इस ट्रांजिट कॉरिडोर नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है।

खिवनी अभयारण्य केवल एक वन क्षेत्र नहीं, बल्कि पुनर्जीवन, संतुलन और नई उम्मीद की प्रेरक कहानी है, जो मध्यप्रदेश को वन्यजीव संरक्षण और इको-पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।