रायपुर, 24 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / ISRO’s satellite and drone survey reveals illegal felling of 1 lakh trees in 15 years in the core area of Chhattisgarh’s Tiger Reserve / टाइगर रिजर्व अवैध पेड़ कटाई , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग ने उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर वन्यप्राणी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण का खुलासा किया है।
आधुनिक तकनीक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों से यह सामने आया है कि पिछले 15 वर्षों में लगभग 106 हेक्टेयर (265 एकड़) क्षेत्र में अवैध कब्जा कर करीब एक लाख पेड़ों की कटाई की गई है।
टाइगर रिज़र्व के बाहर स्थित जैतपुरी गांव (यह अतिक्रमण) के 166 लोगों द्वारा किया गया, जिनके विरुद्ध विभिन्न प्रकरण दर्ज कर उन्हें बेदखली नोटिस जारी किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में यही अतिक्रमण 45 हेक्टेयर में था, जो समय के साथ बढ़कर 106 हेक्टेयर हो गया।
अतिक्रमण क्षेत्र में कटे हुए पेड़ और ठूंठ चिन्हित
ड्रोन सर्वे से तैयार हाई-रिज़ोल्यूशन इमेजरी में अतिक्रमण क्षेत्र के प्रत्येक खेत, कटे हुए पेड़ और ठूंठ को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है। वहीं इसरो की कार्टाेसैट सैटेलाइट इमेजरी (2006, 2008, 2010, 2012 और 2022) से वन क्षेत्र में तेजी से आई कमी का प्रमाण मिला है। जहां पहले एक हेक्टेयर में लगभग 1000 पेड़ थे, वहां अब यह संख्या घटकर मात्र 25 से 50 रह गई है।
पेड़ों की कटाई कें साथ “गर्डलिंग” जैसी तकनीकों का उपयोग कर वृक्षों को सुखाकर जमीन खाली की
वन विभाग के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने न केवल पेड़ों की कटाई की, बल्कि “गर्डलिंग” जैसी तकनीकों का उपयोग कर वृक्षों को सुखाकर जमीन खाली की।
जांच में यह भी पाया गया कि कई आरोपियों के पास राजस्व भूमि पहले से मौजूद होने के बावजूद लालचवश वन भूमि पर कब्जा किया गया।
सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी
यह क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व का कोर जोन है और महानदी का उद्गम स्थल भी है। यहां हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यप्राणियों का महत्वपूर्ण आवास है। अतिक्रमण से क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 7 वर्ष तक और लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत 3 वर्ष तक सश्रम कारावास का प्रावधान है। साथ ही अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को भी अटैच किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने पिछले 3 वर्षों में 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया है तथा 600 से अधिक शिकारी, तस्कर और अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार किया है। इसके परिणामस्वरूप मानव-वन्यप्राणी संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आई है।
बेदखली के बाद अतिक्रमित भूमि पर भू-जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की जाएंगी और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर क्षेत्र की पारिस्थितिकी को पुनर्स्थापित किया जाएगा।
राज्य सरकार की इस सख्त कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जनहित में प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
