रायपुर,10 मई 2026/ ETrendingIndia / Digital preservation of 500-year-old cultural heritage – rare manuscripts found in Pendra / डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण ,भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” के तहत छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।
पेंड्रा नगर की पुरानी बस्ती में सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों और दस्तावेजों को खोज निकाला गया है, जिन्हें अब डिजिटल माध्यम से भविष्य के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।
दो प्रमुख स्थानों से अमूल्य धरोहरें प्राप्त
सर्वेक्षण दल को पेंड्रा के वार्ड क्रमांक 4 में दो प्रमुख स्थानों से अमूल्य धरोहरें प्राप्त हुई हैं। 500 वर्ष पुरानी अथ श्रीमद्भागवत गीता पंडित मोहन दत्त शर्मा के निवास से हस्तलिखित गीता सहित कई धार्मिक ग्रंथ मिले। यह पांडुलिपियां आकर्षण का केंद्र रहीं.
जिन पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने श्रद्धापूर्वक मत्था टेका। सर्वेक्षण के दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के निवास से लगभग 200 वर्ष पुरानी हस्तलिखित जमींदारी वंशावली तथा पेंड्रागढ़ क्षेत्र के राजस्व एवं वन विभाग से संबंधित ऐतिहासिक नक्शे भी प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों को भी डिजिटल तकनीक के माध्यम से संरक्षित किया गया।
कलेक्टर ने राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शिखा सिंह से पारिवारिक इतिहास, जमींदारी परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों के संबंध में विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे दस्तावेज स्थानीय इतिहास और प्रशासनिक संरचना को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धार्मिक एवं शास्त्रीय ज्ञान की अनमोल पांडुलिपियां
प्राप्त पांडुलिपियों में लग्न चन्द्रिका, इतिचंद्रिकाआख्यातप्रारम्भः, अथश्रीभागवतमहात्यंप्रारग्यते, यद्वादशमहावाक्यनिंएयिप्रारंभः, शीर्घवोधशठीकप्रारंभःरामचंद्रायनमः तथा इति सारस्वत तद्वित प्रक्रिया समाप्ताः संवत् 1925 श्रीः अश्विनशुक्ल जैसी प्राचीन हस्तलिखित सामग्री शामिल है।
इन ग्रंथों की भाषा, लेखन शैली और संरक्षण की स्थिति प्राचीन भारतीय विद्या, संस्कृत साहित्य और धार्मिक अध्ययन की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।
आधुनिक तकनीक से संरक्षण (जियो-टैगिंग)
इन दुर्लभ ग्रंथों को ज्ञानभारतम एप के माध्यम से जियो-टैगिंग कर डिजिटल रूप में संरक्षित किया गया है। ये पांडुलिपियां अपने मूल मालिकों के पास ही रहेंगी।
डिजिटल संरक्षण का उद्देश्य केवल इनके ज्ञान को सुरक्षित करना है, ताकि परिवार की विरासत और सांस्कृतिक पहचान बने रहे.
कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि हमारी ज्ञान परंपरा और इतिहास की अमूल्य धरोहर है।
उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के इस खजाने को सुरक्षित रखने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
विरासत को सहेजता संयुक्त परिवार
धार्मिक पांडुलिपियों के संरक्षण और स्मृति चिह्नीकरण के लिए पंडित मोहन दत्त शर्मा के दस सदस्यीय संयुक्त परिवार के साथ विशेष फोटोग्राफी भी की गई।
परिवार में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शशीदेवी शर्मा, पुत्र गिरीश दत्त शर्मा एवं संदीप दत्त शर्मा, पुत्रवधुएं रंजीता शर्मा एवं अमृता शर्मा, पोते वरुण दत्त शर्मा, वेदांत दत्त शर्मा, सारस्वत दत्त शर्मा तथा पोती सौम्या शर्मा शामिल रहे।
