Supreme Court's concern over road safety
Supreme Court's concern over road safety
Share This Article

रायपुर 14 मई 2026/ ETrendingIndia / Supreme Court’s concern over road safety: Lack of lane driving and ignoring tracking system becomes major problem / सड़क सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट , Supreme Court of India ने देश में बढ़ते सड़क हादसों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि भारत में “लेन ड्राइविंग” की संस्कृति लगभग नहीं के बराबर है, जो दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है।

जस्टिस J.B. Pardiwala और K.V. Viswanathan की बेंच सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।

1% से भी कम सार्वजनिक वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमों के बावजूद देश में 1% से भी कम सार्वजनिक वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन लगे हैं।

अदालत ने सभी राज्यों को नए और पुराने सार्वजनिक वाहनों में समयबद्ध तरीके से ये सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए हैं।

हर दिन 546 लोगों की सड़क हादसों में मौत का भयावह आँकड़ा

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिदिन औसतन 546 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है।

वर्ष 2024 में करीब 1.99 लाख लोगों की जान गई, जो 2023 की तुलना में अधिक है।

शाम का समय सबसे खतरनाक

रिपोर्ट के मुताबिक शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा 20.4% सड़क हादसे दर्ज किए गए। इसके बाद दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे के बीच 17.1% दुर्घटनाएं हुईं।

दोपहिया वाहन हादसों में सबसे ज्यादा मौतें

देश में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक 48.3% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी रहीं। वहीं पैदल चलने वालों की मौत का आंकड़ा 14.7% और कार दुर्घटनाओं का हिस्सा 13.6% रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हादसे

कुल सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 59.7% मामले ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज किए गए, जबकि 40.3% हादसे शहरी इलाकों में हुए। मई महीना सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं वाला महीना रहा।

जीडीपी पर भी बड़ा असर

विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के कारण भारत को सामाजिक और आर्थिक रूप से भारी नुकसान हो रहा है। इसकी लागत देश की जीडीपी के लगभग 3.14% के बराबर आंकी गई है।

युवा और कार्यशील लोगों की व्यापक मौत

भारत में लगातार और भयावह रूप से बढ़ रही मौत का सबसे दुखद पक्ष यह भी है कि इसमें युवा और कार्यशील लोगों की संख्या बहुतायत से है. इनकी मृत्यु से पूरे परिवार पर आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ जाता है. इससे भी दुखद बात थी कि अगर मौत से बचाव हो भी जाए तो विकलांगता के कारण उनकी शारीरिक क्षमता और आर्थिक उपार्जन पर काफी प्रभाव पड़ता है.

यातायात नियमों का पालन नहीं करना सबसे बड़ी कमजोरी

भारत में सड़क दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह यातायात नियमों की अनदेखी और उनका पालन नहीं करना है. वहीं, सड़कों में बढ़ रही भीड़ ,आपाधापी भरी तेज ज़िंदगी और वाहनों के रखरखाव में कमी भी प्रमुख कारण है.

तेज लाइट आँखों के सामने कर देती है अंधेरा

वर्तमान समय में तेज गति से चलने वाले
कार, चौपहिया वाहन और ट्रक आदि की तेज लाइट सीधी आंखों पर पड़ती है। नियम विरुद्ध लगाए गए इन सफेद चमकदार लाइट से दुर्घटना की संभावना काफी बढ़ जाती है.