suryakant gupta kavitayen
suryakant gupta kavitayen
Share This Article

छोटे छोटे लक्ष्य बनाओ
पाने आगे बढ़ते जाओ
चमत्कार की छोड़ो आशा
श्रम से बिलकुल मत घबराओ

कितनी भूख है…

जिसकी जितनी भूख है, उतना ले आहार।
आवश्यकता से अधिक, लेना है बेकार।।
लेना है बेकार, लोभवश ज़्यादा खाना।
होकर के लाचार, वैद्य को पड़े दिखाना।।
कहना मुश्किल ‘कांत’, भूख कितनी है किसकी।
उतना ले आहार, भूख जितनी है जिसकी।।

घोटाले…

घोटाले टाले नहीं, टलते जान सुजान।
मुख्य स्रोत लगता हमें, बनवाता धनवान।।
बनवाता धनवान, उजागर झट हो जाता।
न्यायालय में सिद्ध, बमुश्किल यह हो पाता।।
यही दुधारू गाय, मान बैठे हैं पाले।
क्या है आज उपाय, कौन टाले घोटाले।।

सूर्यकांत गुप्ता, जुनवानी, भिलाई (छत्तीसगढ़)

रायपुर, 23 मई 2026/ ETrendingIndia /

जीवन परिचय
नामः सूर्यकान्त गुप्ता
पिताः स्व. प्रकाश कुमार गुप्ता
माताः स्व. प्रेमलता गुप्ता
ध.पत्नी.. श्रीमती सुरेखा गुप्ता
जन्म तिथि: १७/०५/१९६३
शिक्षा : वाणिज्य स्नातकोत्तर
व्यवसाय : सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी – अधीक्षक, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर
निवास : फ्लैट नंबर 26 ,चौहान पार्क व्हयू जुनवानी भिलाई, छत्तीसगढ़
📱7974466865