Share This Article आज फेसबुक में यह चित्र दिखा…इस चित्र पर कविता लिखनी थी कविता तो मुझसे ना बनी…एक लेख लिखने का मन हुआबताइए कैसा बना है… एक छोटे से घर में माता पिता और चार भाई बहन गुजारा करते थे. समय के साथ बहनों की शादी हो गई। कुछ समय बाद भाइयों की भी शादी हुई तो घर में जगह की कमी के कारण पहले माले में 2 कमरे बनवाये गए। दोनों बेटे और बहुएं ऊपर के कमरे में रहने लगे। नीचे माता पिता का कमरा और रसोई थी। ऊपर और नीचे को जोड़ती थी सीढ़ी … बहुएं जब नीचे उतरती या ऊपर चढ़तीं तो उनके पायलों की रुनझुन से घर में रौनक बनी रहती थी। 15 साल बाद माता पिता बूढ़े हो चले थे।बेटों के बच्चे बड़े होने लगे थे, ऊपर के माले का विस्तार किया गया तो रसोई भी ऊपर चली गई। रसोई ऊपर जाने से सीढ़ी से आने वाली पायल की रुनझुन खत्म सी हो गई। बूढ़े माता पिता इस रौनक के लिए तरसने लगे थे. आँखे सीढ़ी की ओर लगी रहती थी कि शायद कोई उतरकर कुछ देर ही सहीं उनके पास बैठकर बात कर ले…. सुरेखा गुप्ता, जुनवानी, भिलाई सुरेखा गुप्तापति श्री सूर्यकांत गुप्तापिता श्री दयाशंकर गुप्तामाता श्रीमती कुसुम गुप्ताएम ए राजनीति शास्त्रभारतीय स्टेट बैंक से अवकाश प्राप्तरुचि लघुकथा लेखनजुनवानी भिलाई छत्तीसगढ़ Share This Article Post navigation Parker Smriti Samman : स्वर्गीय रामप्यारा पारकर की याद में ‘सुरता पारकर ‘ का आयोजन…! महिला उत्थान के लिए श्रीमती माधुरी कैवर्त को मिला पारकर स्मृति सम्मान Hindi Story Collection : कहानी-संग्रह ‘माटी के पंख’…! विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भेंट