रायपुर, 3 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / Indira Nooyi’s statement: “Got the opportunity in the US… I probably could never have become a CEO in India.” पेप्सिको की पूर्व चेयरपर्सन इंदिरा नूयी ने कहा है कि उन्हें अमेरिका की योग्यता-आधारित व्यवस्था (मेरिट आधारित सिस्टम) ने आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका मानना है कि यदि वह भारत या दुनिया के कई अन्य देशों में होतीं, तो शायद कभी किसी बड़ी कंपनी की सीईओ नहीं बन पातीं।
मेरिट आधारित व्यवस्था को बताया सफलता का आधार
नूयी ने कहा कि अमेरिका में प्रतिभा और काम के आधार पर आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय इसी व्यवस्था को दिया।
भारत और चीन की तुलना
अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि चीन में व्यवस्था अधिक संगठित दिखाई देती है, जबकि भारत में कई क्षेत्रों में अव्यवस्था की चुनौती है। उनका मानना है कि बेहतर संस्थागत व्यवस्था से प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
बयान पर छिड़ी बहस
इंदिरा नूयी के इस बयान पर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने इसे भारत की कार्य संस्कृति और सामाजिक चुनौतियों का ईमानदार आकलन बताया, जबकि अन्य ने कहा कि भारत में भी महिलाओं और प्रतिभाशाली लोगों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं और उनके बयान में भारतीय परिस्थितियों का अत्यधिक सामान्यीकरण किया गया है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत में कॉर्पोरेट नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, हालांकि समान अवसर, नेतृत्व में प्रतिनिधित्व और कार्यस्थल पर लैंगिक संतुलन जैसी चुनौतियों पर अभी भी लगातार काम किए जाने की आवश्यकता बनी हुई है।
