Share This Article रायपुर, 21 जुलाई 2026/ US Currency: The big secret of American currency…! Why do dollar notes not burst after folding them 4,000 times? You will be surprised to know the reason US Currency : क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब में रखा नोट कुछ महीनों में फटने-पुराना होने लगता है, लेकिन अमेरिकी डॉलर के नोट सालों तक लगभग वैसे ही बने रहते हैं? हैरानी की बात तो यह है कि एक अमेरिकी नोट को करीब 4,000 बार तक मोड़ा जा सकता है, फिर भी वह आसानी से नहीं फटता। आखिर इसके पीछे कौन-सी खास तकनीक और विज्ञान काम करता है? आइए जानते हैं अमेरिकी करेंसी की मजबूती का वह दिलचस्प राज, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर रखा है। दरअसल, अमेरिका का 100 डॉलर का नोट साधारण पेपर से नहीं बनता। इसे 75% कॉटन (कपास) और 25% लिनेन (सन के रेशे) के विशेष मिश्रण से तैयार किया जाता है। यही कारण है कि अमेरिकी नोट सामान्य कागज की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। क्यों नहीं इस्तेमाल होता सामान्य कागज? अगर डॉलर के नोट साधारण लकड़ी से बने कागज पर छापे जाएं, तो वे जल्दी फट सकते हैं और खराब हो सकते हैं। कॉटन-लिनेन मिश्रण नोटों को बार-बार मोड़े जाने, पानी की हल्की नमी और रोजमर्रा के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से सहने योग्य बनाता है। 100 डॉलर के नोट के सुरक्षा फीचर 3D सिक्योरिटी रिबनरंग बदलने वाली घंटी (Color-Shifting Bell)वॉटरमार्कसिक्योरिटी थ्रेडमाइक्रो प्रिंटिंगउभरी हुई (Raised) प्रिंटिंगइन आधुनिक सुरक्षा फीचर्स की वजह से नकली नोट बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। एक नोट कितने समय तक चलता है? अमेरिकी 100 डॉलर का नोट औसतन 20 से 23 वर्ष तक चल सकता है। इसकी लंबी उम्र का मुख्य कारण इसका मजबूत कॉटन-लिनेन मिश्रण और उच्च गुणवत्ता वाली प्रिंटिंग तकनीक है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया जाता है कि इसे फटने से पहले हजारों बार, लगभग 4,000 बार तक मोड़ा जा सकता है, हालांकि इस संख्या की अमेरिकी अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। क्या भारत के नोट भी ऐसे ही बनते हैं? नहीं। भारतीय नोट भी साधारण कागज से नहीं बनते, बल्कि विशेष कॉटन आधारित बैंकनोट पेपर पर छापे जाते हैं, जिसमें सुरक्षा के लिए कई विशेष तत्व शामिल होते हैं। Share This Article Post navigation भारत की राष्ट्रपति ने भारत-मोल्दोवा बिज़नेस फोरम को संबोधित किया अमेरिका जल्द लगाएगा 10% से 12.5% तक नए टैरिफ, कई देशों पर बढ़ सकता है व्यापारिक दबाव