लोकसभा में मंगलवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने तथा छात्रों के साथ कठोर व्यवहार करने का आरोप लगाया।
उनके भाषण के दौरान कई बार हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष ने उनके कुछ बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई।
चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और लगातार प्रश्नपत्र लीक होने से करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में कई कमियां आ चुकी हैं और सरकार अब तक प्रश्नपत्र लीक के कथित दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने में असफल रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के गठन के बाद परीक्षा प्रणाली का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ, जिससे समस्याएं बढ़ीं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि शिक्षा पर होने वाले सरकारी व्यय का अनुपात अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ रहा है।
प्रियंका गांधी ने दिल्ली में प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके लिए जिम्मेदार कौन था। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर सदन और देश के सामने जवाब देना चाहिए।
अपने संबोधन के दौरान प्रियंका गांधी ने नए कार्यवाहक शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मंत्री के संबंध में एक टिप्पणी की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे किसी व्यक्ति के चरित्र पर हमला बताते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं और इन्हें सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रियंका गांधी से माफी की भी मांग की।
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे कुछ समय के लिए सदन का माहौल गरमा गया।
हंगामे के बीच जब प्रियंका गांधी को दोबारा बोलने का अवसर मिला तो उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुस्कराते हुए कहा, आप मुझ पर नाराज हो रहे हैं, थोड़ा मुस्करा लीजिए।
उनके इस कथन के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए हल्का हुआ, हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा।
प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी प्रावधान दिखाई नहीं देते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल नई समितियां गठित कर रही है, जबकि पूर्व में बनी समितियों की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं का विश्वास पुन: हासिल करना चाहती है तो केवल प्रचार से काम नहीं चलेगा, बल्कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार करना होगा।
प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें कैमरे का कोण नहीं, बल्कि अपने दिल का कोण बदलने की जरूरत है।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है।
सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों पर और अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
