रायपुर, 04 अगस्त 2026/ Swiggy-Zomato : बेंगलुरु के बाद अब कोलकाता में भी फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ रेस्टोरेंट मालिकों का विरोध तेज हो गया है। रेस्टोरेंट संचालकों का आरोप है कि भारी कमीशन, विज्ञापन शुल्क, प्लेटफॉर्म फीस और छिपे हुए चार्जेस उनके कारोबार पर गंभीर असर डाल रहे हैं। कई रेस्टोरेंट्स ने अब अपने स्वयं के डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत करना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ ने ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर्स से दूरी बना ली है।
12% से बढ़कर 32% तक पहुंचा कमीशन
‘6 बालीगंज प्लेस’ के संस्थापक निदेशक शेफ सुशांत सेनगुप्ता के मुताबिक, शुरुआती दौर में प्रति ऑर्डर 12-15% कमीशन लिया जाता था। कोविड-19 के बाद यह पुराने रेस्टोरेंट्स के लिए 19-23% और नए रेस्टोरेंट्स के लिए 28-32% तक पहुंच गया है। इसके अलावा 18% GST और अन्य छिपे चार्जेस भी जोड़ दिए जाते हैं, जिससे मुनाफा लगातार घट रहा है।
कुल कटौती 60% तक पहुंचने का दावा
‘सांझा चूल्हा’ के मालिक आसिफ अहमद का कहना है कि कई मामलों में कुल कटौती 40% से लेकर 60% तक पहुंच जाती है। उनका आरोप है कि ग्राहकों से सुविधा शुल्क लिया जाता है, लेकिन इसका बोझ रेस्टोरेंट्स पर डाला जाता है। इसी वजह से उनका व्यवसाय वर्षों से अपने खुद के डिलीवरी सिस्टम पर निर्भर है।
कई रेस्टोरेंट्स ने छोड़ा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
‘द येलो टर्टल’ की मालिक अपेक्षा लाहिड़ी ने बताया कि उन्होंने पिछले 6-8 महीनों से Swiggy का बहिष्कार कर रखा है। उनका कहना है कि कमीशन, डिस्काउंट और प्लेटफॉर्म चार्जेस के बाद ऑर्डर वैल्यू का 70% से अधिक हिस्सा विभिन्न कटौतियों में चला जाता है। बिना अनुमति विज्ञापन अभियान शुरू करने और शिकायतों पर रिफंड न मिलने से भी नाराजगी बढ़ी है।
सीधे ग्राहकों तक पहुंचने की तैयारी
बिरयानी चेन ‘अमीनिया’ की सेल्स एंड मार्केटिंग डायरेक्टर अजरा गुलाम ने कहा कि बढ़ते कमीशन के कारण कंपनी अब ऑनलाइन एग्रीगेटर्स पर निर्भर रहने के बजाय सीधे ग्राहकों तक पहुंचने और वैकल्पिक डिलीवरी चैनल विकसित करने पर काम कर रही है।
इस पूरे मामले पर नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) का कहना है कि रेस्टोरेंट उद्योग की चिंताओं को संबंधित पक्षों के सामने उठाया गया है और समाधान के लिए चर्चा जारी है।
