रायपुर, 04 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ का मामला एक बार फिर अमेरिकी अदालत में पहुंच गया है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 राज्यों ने भारत समेत देश के 60 व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए नवीनतम टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है।
राज्यों ने इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा फरवरी में रद्द किए गए आयात करों को बदलने का नया बहाना बताया और कहा कि ट्रंप प्रशासन कानूनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर मुकदमे में 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा-301 के तहत पिछले महीने से लागू 10-12.5 प्रतिशत तक के टैरिफ को लक्षित किया गया है।
ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, ये शुल्क उन देशों को निशाना बनाते हैं जो जबरन श्रम से बने सामानों के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाते हैं।
मुकदमों का नेतृत्व राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के राज्यपाल या अटॉर्नी जनरल कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हारने के बाद ट्रंप प्रशासन एक बार फिर टैरिफ के एक नए दौर के साथ परिवारों और व्यवसायों पर अवैध रूप से कर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
मुकदमा करने वालों में न्यूयॉर्क के साथ-साथ एरिज़ोना, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, केंटकी, मैसाचुसेट्स, मैरीलैंड, मेन, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, नॉर्थ कैरोलिना, ओरेगन, पेंसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, वर्जीनिया, वर्मोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप का टैरिफ आदेश निरस्त होने के बाद इस साल जुलाई में ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत नया टैरिफ लगाया था।
अमेरिका ने कहा कि जबरन श्रम प्रथाओं से संबंधित चिंताओं के कारण ये टैरिफ लगाए जा रहे हैं।
भारत, ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत और चीन, इजरायल, जापान समेत 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगा है।
व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर किसी देश की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी कारोबार या उद्योगों के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसानदायक मानी जाएं, तो वह उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
इसके तहत टैरिफ की कोई अधिकतम सीमा या समय सीमा नहीं है, लेकिन इन्हें लागू करने से पहले औपचारिक जांच जरूरी है।
अमेरिका भारत के खिलाफ धारा 301 के 2 मामलों की जांच कर रहा है।
