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रायपुर, 12 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका में डिजिटल एसेट्स को लेकर नए कानून की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए स्पष्ट कानून बनाने की मांग तेज हो गई है।

संसदीय समिति ने नियमन की खामियों को दूर करने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने की सिफारिश की है।

अमेरिका में क्रिप्टो बिल पर आगे बढ़ा कदम

अमेरिकी सीनेट में ‘डिजिटल एसेट मार्केट क्लैरिटी एक्ट’ पर आगे की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून ने इस पर बहस खत्म करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे 15 सितंबर को प्रक्रियात्मक मतदान का रास्ता साफ हुआ है। यह विधेयक जुलाई 2025 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से द्विदलीय समर्थन के साथ पारित हो चुका है।

भारत में भी स्पष्ट कानून की जरूरत

अमेरिकी पहल के बीच भारत की संसदीय वित्त मामलों की स्थायी समिति ने VDA और क्रिप्टोकरेंसी के लिए उपयुक्त कानूनी व नियामकीय ढांचा तैयार करने की जरूरत बताई है।

समिति ने मौजूदा नियमन की कमियों की व्यापक समीक्षा की सिफारिश की है।

कानून बनने तक अंतरिम व्यवस्था का सुझाव

समिति ने स्थायी कानून बनने तक नियामक की निगरानी में मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठनों (SRO) के जरिए अंतरिम व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है।

अमेरिका का कानून क्या करेगा ?

अमेरिकी प्रस्ताव का उद्देश्य डिजिटल कमोडिटी के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करना और SEC तथा CFTC के अधिकार-क्षेत्र को स्पष्ट करना है। इसमें डिजिटल एसेट मध्यस्थों और विभिन्न डिजिटल एसेट्स के वर्गीकरण से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

अमेरिका की पहल ने भारत में क्रिप्टो और VDA को लेकर स्पष्ट, व्यापक और कानूनी नियमन की जरूरत पर बहस को फिर तेज कर दिया है।


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