Share This Article रायपुर, 13 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / एंटीबायोटिक और अन्य एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार इनके पैकेज पर नीली पट्टी (Blue Strip) लगाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की बढ़ती समस्या से निपटना है। ब्लू स्ट्रिप क्या होगी ? ब्लू स्ट्रिप दवा के पैकेट पर लगाया जाने वाला स्पष्ट नीला पहचान-चिह्न होगा। इससे मरीज, फार्मासिस्ट और स्वास्थ्यकर्मी आसानी से पहचान सकेंगे कि संबंधित दवा एंटीमाइक्रोबियल श्रेणी की है। इससे क्या फायदे होंगे ? एंटीबायोटिक दवाओं की पहचान तुरंत हो सकेगी। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने और देने पर जागरूकता बढ़ेगी। दवाओं के गलत और अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है। एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी दवाओं के खिलाफ संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। दवा की सही श्रेणी को लेकर मरीजों और दुकानदारों में भ्रम कम होगा। क्यों जरूरी है यह कदम ? एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा या गलत इस्तेमाल करने पर बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए सरकार एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की पहचान और निगरानी को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की ट्रैक-एंड-ट्रेस व्यवस्था इसके अलावा, जून 2026 में सरकार ने एंटीमाइक्रोबियल दवाओं को QR कोड आधारित ट्रैक-एंड-ट्रेस व्यवस्था के दायरे में भी शामिल किया है, जिससे इनकी आपूर्ति श्रृंखला में पहचान और निगरानी मजबूत होगी। महत्वपूर्ण पहचान संकेत ब्लू स्ट्रिप सिर्फ एक रंग की पट्टी नहीं, बल्कि एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल और AMR के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पहचान संकेत बन सकती है। Share This Article Post navigation एअर इंडिया को मिला नया कप्तान…टेवोल्डे गेब्रेमारियम होंगे CEO-MD Vehical Insurance : नई कार का 4 साल, दोपहिया का 6 साल…! बिना बीमा ईंधन पर भी लग सकती है रोक