Javelin Missile: India to get America’s ‘Javelin’...! What are the features of this tank-destroying missile?Javelin Missile
Share This Article

रायपुर, 29 अगस्त 2026/ Javelin Missile : भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारत ने अमेरिका से Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए Letter of Offer and Acceptance (LOA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह सिस्टम भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

क्या है Javelin Missile System?

Javelin एक मैन-पोर्टेबल, कंधे से लॉन्च किया जाने वाला फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक सिस्टम है। इसे एक सैनिक भी ले जाकर इस्तेमाल कर सकता है। इसे अमेरिकी कंपनियों Raytheon और Lockheed Martin के Javelin Joint Venture ने विकसित और निर्मित किया है।

इसकी सबसे खास तकनीक Fire-and-Forget है। यानी लॉन्च से पहले सिस्टम लक्ष्य को लॉक करता है और मिसाइल दागे जाने के बाद ऑपरेटर को लगातार उसे गाइड करने की जरूरत नहीं पड़ती। मिसाइल खुद लक्ष्य की ओर बढ़ती है, जिससे गनर तुरंत अपनी स्थिति बदलकर जवाबी फायर से बच सकता है।

टैंक के ऊपर से करता है हमला

Javelin की एक बड़ी खासियत इसका Top-Attack Mode है। इस मोड में मिसाइल लक्ष्य के ऊपर चढ़कर उसके अपेक्षाकृत कमजोर ऊपरी हिस्से पर हमला करती है। यह क्षमता इसे आधुनिक बख्तरबंद वाहनों और टैंकों के खिलाफ प्रभावी बनाती है। जरूरत के अनुसार सिस्टम Direct Attack मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

बंकर और इमारत के अंदर से भी फायर

Javelin को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका soft-launch सिस्टम इसे इमारतों या बंकर जैसी जगहों के अंदर से भी दागने की सुविधा देता है। इससे सैनिक खुले इलाके में आए बिना भी लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है Javelin?

भारत लंबे समय से अपनी एंटी-टैंक क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। Javelin के शामिल होने से भारतीय सेना को एक ऐसा पोर्टेबल सिस्टम मिलेगा जो सैनिकों को लक्ष्य पर हमला करने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदलने की सुविधा देता है।

अमेरिका ने नवंबर 2025 में भारत के लिए Javelin सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दी थी। उस प्रस्ताव में 100 FGM-148 Javelin राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 Command Launch Units शामिल थे। प्रस्तावित पैकेज की अनुमानित कीमत 45.7 मिलियन डॉलर थी।

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को भी मिलेगी मजबूती

Javelin सौदा केवल मिसाइल खरीद तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक इससे भविष्य में भारत और अमेरिका के रक्षा उद्योगों के बीच सह-उत्पादन और सहयोग के रास्ते भी खुल सकते हैं। Javelin Joint Venture पहले ही भारत में संभावित co-assembly और co-production के अवसर तलाशने की बात कह चुका है। यानी Javelin भारत की सेना की एंटी-टैंक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक और उत्पादन सहयोग को भी नई दिशा दे सकता है।


Share This Article