Share This Article रायपुर, 01 सितम्बर2026/ ETrendingIndia / 0-पॉलिसी की सही जानकारी देकर जीता भरोसा, कर और शुल्क के नाम पर कई बार कराए पैसे जमा अहमदाबाद,31 अगस्त (आरएनएस)। गुजरात के अहमदाबाद में बीमा पॉलिसी के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर 45 वर्षीय महिला पुलिस निरीक्षक को झांसे में लिया और करीब 5.4 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने पहले महिला को उसकी बीमा पॉलिसियों से जुड़ी सही जानकारी देकर विश्वास में लिया और बाद में अलग-अलग बहानों से उसके खाते से रकम स्थानांतरित करा ली। रिपोर्ट के मुताबिक, ठगी की शुरुआत 11 अगस्त को एक अनजान नंबर से आए फोन के जरिए हुई। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बीमा कंपनी के दिल्ली कार्यालय का कर्मचारी बताया। उसने महिला को उसकी दो बीमा पॉलिसियों की जानकारी दी। जालसाज ने दावा किया कि किसी एजेंट ने महिला की पॉलिसी की 80 प्रतिशत राशि के लिए दावा किया है। पॉलिसी से संबंधित जानकारी सही बताए जाने के कारण महिला को उस व्यक्ति पर भरोसा हो गया। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को कंपनी का प्रबंधक बताते हुए महिला से संपर्क किया। उसने दावा किया कि महिला को प्रीमियम और ब्याज मिलाकर करीब 19.5 लाख रुपये की राशि मिलने वाली है। हालांकि, राशि जारी करने के लिए पहले 99,227 रुपये जमा करने को कहा गया। जालसाजों ने इसके बाद महिला से कथित तौर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नाम पर करीब 4.4 लाख रुपये और जमा करने को कहा। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि यह रकम बाद में बीमा राशि के साथ वापस कर दी जाएगी। महिला ने उनके कहने पर क्यूआर कोड के माध्यम से 50 हजार रुपये भेजे। इसके बाद 19 और 20 अगस्त को बैंक के माध्यम से करीब 3.9 लाख रुपये और स्थानांतरित कर दिए। रिपोर्ट के अनुसार, 24 अगस्त को जालसाजों ने महिला से दोबारा संपर्क किया और कहा कि उसकी पॉलिसी की कुल राशि बढ़कर 24.9 लाख रुपये हो गई है। इसके बाद उन्होंने भुगतान जारी करने के नाम पर महिला से 5.1 लाख रुपये और जमा करने को कहा। इस स्तर पर महिला को ठगी का संदेह हुआ। अलग-अलग चरणों में रकम जमा कराने के बाद उसे एहसास हुआ कि वह साइबर ठगों के जाल में फंस चुकी है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस घटना से साफ है कि साइबर ठग केवल सामान्य जानकारी के आधार पर ही लोगों को निशाना नहीं बनाते। वे कई बार पहले से उपलब्ध व्यक्तिगत या पॉलिसी संबंधी जानकारी का इस्तेमाल कर पीडि़त का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद कर, प्रसंस्करण शुल्क, सत्यापन शुल्क या अन्य बहानों से रकम जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।बीमा पॉलिसी से संबंधित किसी अनजान फोन कॉल पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। सामने वाला व्यक्ति आपकी पॉलिसी की सही जानकारी बताए, तब भी उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित बीमा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या पॉलिसी दस्तावेज में दिए गए संपर्क नंबर पर स्वयं फोन कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। प्रसंस्करण शुल्क, जीएसटी, सत्यापन या पॉलिसी जारी करने के नाम पर तत्काल पैसे जमा कराने का दबाव बनाने वालों से विशेष सावधानी बरतें। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन नहीं करना चाहिए और किसी अज्ञात बैंक खाते में रकम स्थानांतरित नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा एकमुश्त पासवर्ड (ओटीपी), व्यक्तिगत पहचान संख्या (पिन), बैंक खाते की जानकारी, कार्ड संबंधी विवरण या अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को साइबर ठगी का संदेह हो तो उसे तुरंत अपने बैंक से संपर्क कर संदिग्ध लेनदेन की जानकारी देनी चाहिए और संबंधित साइबर अपराध प्राधिकरण या पुलिस को शिकायत करनी चाहिए। Share This Article Post navigation बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली… देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है केन-बेतवा लिंक परियोजना… दिल्ली में एसआईआर के बाद 1.45 करोड़ मतदाताओं में 47.7 लाख नाम कटे, 4 नवंबर को प्रकाशित होगी अंतिम सूची