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 सिक्किम में नेपाल जैसी भयावह बाढ़ की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। यहां की 40 हिमनदी झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। भारतीय हिमालय में स्थित 189 उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलों में 40 सिक्किम की सीमाओं के भीतर हैं। ऐसे में संभावित हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ का खतरा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वैज्ञानिक निगरानी तेज कर दी है और इंजीनियरिंग संबंधी उपाय तैयार किए हैं।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें 16 झीलों को श्रेणी-ए की संवेदनशीलता में रखा गया है, जबकि 13 झील अभी भी अवर्गीकृत हैं।
ऐसे में राज्य को संवेदनशील झील के लिए वास्तविक समय की निगरानी, वैज्ञानिक मूल्यांकन और स्थल-विशिष्ट शमन उपायों को मिलाकर बहुस्तरीय रणनीति अपनाने को कहा गया है।


अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकता प्राप्त 16 संवेदनशील झीलों में से 13 का विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा चुका है, जिनमें से अधिकांश लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं।


सिक्किम ने 3 प्रमुख उपायों का प्रस्ताव दिया है।
पहले प्रस्ताव के तहत शाको- चू झील में जमे 2.7 करोड़ घन मीटर पानी को 20-40 मीटर तक कम करने के लिए सौर ऊर्जा पंप चलाने का प्रस्ताव है।
अधिकारी दक्षिण-उत्तर ल्होनक क्षेत्र के लिए, लगभग 24 किलोमीटर नीचे स्थित डोल्मा सम्पांग में पत्थर निर्मित जलरोधक संरचना का अध्ययन कर रहे हैं। इससे बाढ़ की तीव्रता कम होगी।
तीसरा प्रस्ताव गुरुदोंगमार झील को प्रभावित किए बिना सुरक्षा दीवार बनाने पर विचार है।


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