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रायपुर, 03 सितंबर / ETrendingIndia / हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियों की समीक्षा की है।

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक कर 24 घंटे निगरानी, समय पर चेतावनी और त्वरित निकासी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।

संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर लगातार नजर

बढ़ते जोखिम के दौरान संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की निरंतर एवं सक्रिय निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और संभावित जल-प्रवाह मार्गों की पहचान पर भी जोर दिया गया।

चेतावनी हर व्यक्ति तक समय पर पहुंचे

प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और चेतावनी को आखिरी छोर तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने की जरूरत बताई गई।

आपदा की स्थिति में तेजी से निकासी और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र तैयार रखने को कहा गया।

केंद्र, राज्य और वैज्ञानिक एजेंसियों में बेहतर तालमेल

राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय और सूचना साझा करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि चेतावनी मिलते ही तत्काल कार्रवाई हो सके।

सिर्फ बचाव नहीं, पहले से जोखिम कम करने पर जोर

गृह सचिव ने कहा कि तैयारियां केवल आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया तक सीमित न रहें। जोखिम-सूचित योजना, निवारक उपाय और सामुदायिक स्तर की तैयारी को मजबूत किया जाए।

GLOF शमन परियोजना में तेजी

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 में स्वीकृत GLOF शमन परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। राज्यों से अपनी तैयारियों की नियमित समीक्षा कर कमियों को आपदा से पहले दूर करने को कहा गया।


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